बालसमंद। हिसार-भादरा मार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर स्थित गांव रावलवास खुर्द सामाजिक सौहार्द, एकता और देशभक्ति की भावना का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। गांव के हर व्यक्ति में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा रग–रग में दौड़ता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान गांव के भले सिंह बलौदा ने न केवल भारतीय सेना का बल्कि पूरे गांव का मान बढ़ाया। खेल मैदान, आधुनिक लाइब्रेरी सहित शिक्षा और विकास से जुड़ीं सभी बुनियादी सुविधाएं इसे आदर्श गांव की पहचान दिलाती है।
वर्ष 1822 में राजस्थान के जैसलमेर से आए रूलीराम के बेटे मामराज कालिरामणा ने रावलवास खुर्द गांव बसाया था। रूलीराम के नाम से इस गांव का नाम रावलवास पड़ा। गांव में हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग सौहार्द्र से रहते हैं। आजादी के आंदोलन से लेकर खेल, बिजनेस और देश सेवा में गांव का अहम योगदान है। फिलहाल 20 से अधिक युवा सेना से जुड़कर देश सेवा में जुटे हैं। 25 शिक्षक ज्ञान का उजियारा फैला रहे हैं। संवाद
देश सेवा में अग्रणी रहे सैनिक
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी मिसाइल को गिराने वाले भले सिंह बलौदा का चयन राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए हुआ है। ब्रिटिश काल में गांव के मुखिया राणा जेलदार रहे। देश की आजादी तक यह कार्य उनके पुत्र भाग सिंह ने किया। गांव के पतराम शर्मा स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे। हेमराज, मामनंद, बीरबल और ख्यालीराम अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी रहे। कई युवा भारतीय सेना में कर्नल व लेफ्टिनेंट के पदों पर कार्यरत हैं।
इन्होंने किया गांव का नाम रोशन
किसान कृष्ण कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर गांव का गौरव बढ़ाया। कृष्ण कुमार दलहनी फसलों की प्राकृतिक खेती करते हैं। सुनील कुमार सिंगल अमेरिका में बिजनेस टाइकून हैं। पवन कुमार दूरदर्शन में निदेशक के पद पर कार्यरत रह चुके हैं।
ये सुविधाएं हैं गांव में
गांव में चार एकड़ से अधिक भूमि पर शहीद भगतसिंह खेल ग्राउंड, इनडोर और ओपन जिम, 2 हरे-भरे पार्क, यातायात सुविधाएं, स्वास्थ्य केंद्र, आयुर्वेदिक केंद्र, पशु अस्पताल और 4 सरकारी स्कूल हैं। इनके अलावा अलग-अलग समाज की 5 धर्मशालाएं, हनुमान मंदिर, शिव मंदिर, अखाड़ा, आंबेडकर भवन और 45 सीटों की आधुनिक सुविधाओं से लेस लाइब्रेरी, बैंक और डाकघर भी हैं।
क्यो बोले ग्रामीण
गांव में शिक्षा के लिए सरकारी और निजी स्कूल हैं। एक लाइब्रेरी भी है जिसमें विद्यार्थी एकांत माहौल में पढ़ाई करते हैं। सरकारी स्कूल 12 वीं तक अपग्रेड हो जाए तो बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों में नहीं जाना पड़ेगा।
- कमल मिठारवाल, ग्रामीण
किसान ज्यादातर दलहनी फसलों की खेती करते हैं। दालों की प्राकृतिक खेती के कारण मुझे देश के प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर मिला। मेरा मानना है कि जहरयुक्त खेती की बजाय किसान प्राकृतिक खेती में भी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
- कृष्ण कुमार, किसान
गांव में खेल, शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई व्यवस्था सहित तमाम सुविधाएं हैं। गांव के चारों तरफ रंग बिरंगी लाइटें, गांव के अंदर और बाहर सफाई व्यवस्था बताती है कि विकास कार्य हो रहे हैं। कम्यूनिटी सेंटर, श्मशान घाट का सुंदरीकरण करवाकर गांव को मॉडर्न बनाना पंचायत की प्राथमिकता रहेगी।
- राजेश झाझड़िया, सरपंच प्रतिनिधि
गांव में दो पार्क बने हैं। बिजली-पानी की सब सुविधाएं मौजूद हैं। पार्क में महिलाओं के लिए शहर की तरह ही सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। युवाओं को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल मिल सके, इसके लिए पंचायत ने लाइब्रेरी बनाई है। दूषित-पानी की निकासी के भी उचित प्रबंध है।
- राकेश कुमार, ग्रामीण
पंचायत का लेखा–जोखा
जनसंख्या : 7000
मतदाता : 5500