हिसार। महाराजा अग्रसेन जिला नागरिक चिकित्सालय में आने वाले मरीज मामूली सुविधाओं के लिए भी भटक रहे हैं। यहां ओपीडी में भीड़ बढ़ने के कारण मरीजों को कई दवाइयां नहीं मिल पा रहीं हैं। खांसी की दवा न मिलने से भी परेशानी बढ़ी है।
शीतकाल शुरू होने के कारण लोग सर्दी, जुकाम, बुखार, खांसी, वायरल आदि मौसमी बीमारियों से जूझ रहे हैं। इस कारण अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या 1,700 से 2,000 तक पहुंच रही है।
हर मरीज को पांच रुपये शुल्क देकर पंजीकरण कराना होता है लेकिन खुले रुपये न होने के कारण कई मरीजाें को भटकना पड़ रहा है। कई बार कर्मचारी इलाज के बाद बाकी रुपये ले जाने के लिए कहते हैं लेकिन तब भी खुले रुपये मिलना मुश्किल हो जाता है जबकि किसी आधार या फोन नंबर एक, दो बार ओपीडी रुपये देकर पर्ची बनने के बाद मुफ्त पर्ची भी बनाई जा रही है।
रोगी पंजीकरण के लिए दो कमरों में पांच काउंटर खोले गए हैं। इसके बावजूद दोपहर एक बजे तक वहां लंबी लाइन लगानी पड़ रही है। हर डॉक्टर को दिखाने के लिए अलग पर्ची बनवानी पड़ रही है। रामवती, संतोषी, राजो, लक्ष्मी आदि मरीजों ने एक ही पर्ची पर सभी डॉक्टरों को दिखाने की सुविधा की मांग उठाई है।
सोमवती मरीज ने बताया कि पर्ची बनवाने और ओपीडी के बाहर लाइन में उन्हें दो घंटे लगे। खून जांच की रिपोर्ट भी तीन घंटे में मिली। बाहरी महिला, पुरुष शौचालय में ताला लगा होने से भी परेशानी हुई जबकि आंतरिक शौचालयों में गंदगी के कारण असहजता हो रही है।
निर्माण कार्य की गति धीमी
अस्पताल में दो माह पहले सुधार कार्य करवाया गया। इसके तहत अस्पताल के बाहरी सुंदरता बढ़ाकर दो सड़कों पर सीसी टाइल्स बिछाई गई हैं लेकिन जिला मलेरिया कार्यालय की ओर यह सड़क अधूरी बनी है। एक वहां धूल और कीचड़ भी फैल रही है। अब मलेरिया कार्यालय, सीएमओ कार्यालय, हर्बल पार्क के पास चार कमरे बनाए जा रहे हैं। पीएमओ कार्यालय के पास छत की वाटरप्रूफिंग भी करवाई जा रही है लेकिन यह कार्य बहुत धीमी गति से करवाया जा रहा है।
: यह बोले रोगी:
मुझे बुखार आया है। मैं वरिष्ठ नागरिक हूं। डेंगू की आशंका है। देर में पहुंचने पर ओपीडी बंद होने के कारण मुझे इमरजेंसी में दिखाना पड़ा। दवा नहीं मिली। - धर्मवीर पिलानिया, कालोद सिवानी।
मैंने चिकित्सक को अपनी परेशानी बताई। उन्होंने मेरे पर्चे में दो दवाइयों के नाम लिखे। काउंटर पर एक ही दवा मिली। - कमल, बारह क्वार्टर।
चिकित्सक ने चार दवाइयां लिखीं। इनमें से दो ही मिलीं। बाजार से दो दवाइयों खरीदने के लिए मेरे पास रुपये नहीं हैं। - शांति, गांव भाटला।
चिकित्सक की ओर से लिखी गईं तीन दवाइयों में से अस्पताल से दो हीं मिलीं। एक दवा बाजार से लेने पड़ेगी। विभाग को सभी दवाइयां उपलब्ध करानी चाहिए। - गुलाब रालावास।
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जिला अस्पताल में अधिकतम जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराईं जा रहीं हैं। बाहर का शौचालय मरम्मत के लिए बंद किया गया है। जो दवाएं खत्म हो रहीं हैं, उन्हें यथाशीघ्र उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। खांसी की दवा का वितरण विभाग ने ही रोका है। - डॉ. रीना जैन, पीएमओ, जिला नागरिक अस्पताल, हिसार।