हिसार। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएसए) की प्रांतीय कार्यकारिणी के आह्वान पर जिले के सभी सरकारी चिकित्सकों ने वीरवार सुबह दो घंटे की पेनडाउन हड़ताल की। सुबह 9 से 11 बजे तक चले इस विरोध के दौरान चिकित्सकों ने वरिष्ठ चिकित्साधिकारियों (एसएमओ) की सीधी भर्ती के निर्णय का कड़ा विरोध जताया।
हड़ताल के चलते जिले के 10 से अधिक सरकारी अस्पतालों में 300 से ज्यादा मरीजों को इंतजार करना पड़ा। इस दौरान चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया, हालांकि प्रसव, रक्तकोष, पोस्टमार्टम सहित सभी आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहीं।
एसोसिएशन के प्रधान डॉ. विक्रम गौराया ने बताया कि लंबे समय से लंबित मांगों के समाधान को लेकर सरकार से मिले आश्वासन धरातल पर लागू नहीं हुए हैं। कुछ देर की प्रतीक्षा के बाद सभी मरीजों का संतोषजनक उपचार कर दिया गया, लेकिन समस्याओं का समाधान न होने से सदस्यों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
कार्यकारी जिला प्रधान डॉ. मनीष पूनिया ने कहा कि सरकार ने चार नवंबर की बैठक के बाद एसएमओ की सीधी भर्ती प्रक्रिया फिर शुरू कर दी, जबकि एचसीएमएसए इसका वर्षों से विरोध कर रहा है।
तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने भी इस भर्ती को रोक दिया था और पिछले वर्ष व्यापक आंदोलन के बाद सेवा नियमों में संशोधन कर इसे समाप्त किया गया था। आश्वासन था कि भविष्य में एसएमओ की सीधी भर्ती नहीं होगी, क्योंकि पूरे देश में यह पद पदोन्नति से ही भरा जाता है।
एसोसिएशन का आरोप है कि इन आश्वासनों के विपरीत भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू कर दी गई है, जबकि मोडिफाइड एसीपी की अधिसूचना वित्त विभाग की अगस्त 2024 की सहमति के बावजूद अब तक जारी नहीं की गई।
विशेषज्ञ डॉक्टर जोड़ने के सुझाव भी लंबित
संघ ने विशेषज्ञ डॉक्टर्स को जोड़ने और बनाए रखने के लिए वैकल्पिक एनपीए, आयुष्मान योजना तथा विशेष प्रोत्साहन जैसे विकल्प भी सरकार को सुझाए थे, लेकिन उन पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया। मजबूरन सांकेतिक हड़ताल करनी पड़ी। जिला मुख्यालय के डॉक्टर वीरवार को सिविल सर्जन कार्यालय में एकत्र हुए। इनमें महासचिव डॉ. अनीश चहल, संयुक्त सचिव डॉ. मीनू, कोषाध्यक्ष डॉ. अंकित, डॉ. अजीत लाठर सहित अन्य चिकित्सक मौजूद रहे।