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28 करोड़ से बने अस्थायी संजीवनी अस्पताल को बंद करने के आदेश

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संजीवनी अस्पताल के अंदर मरीजों के लिए बनाए गए केबिन। फाइल फोटो - फोटो : Hisar
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हिसार। शहर के जिंदल माडर्न स्कूल में 28 करोड़ की लागत से बने चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्थायी अस्पताल को 31 मार्च से बंद करने के आदेश स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय से जारी हुए है। कोरोना महामारी के केस कम होने के साथ ही यह फैसला लिया गया है। फिलहाल वहां पर दो चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और एक स्टनो कार्यरत थे।
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कोरोना महामारी की पहली लहर के बाद गत 17 मई 2021 को सीएम मनोहर लाल ने जिंदल माडर्न स्कूल में अस्थायी चौधरी देवीलाल संजीवनी अस्पताल का उद्घाटन किया गया था। करीब 28 करोड़ रुपये की लागत आई थी। इसमें 500 बेड की व्यवस्था की गई थी। इस अस्पताल में मरीजों के लिए ऑक्सीजन के बेड उपलब्ध कराए गए थे। यह पूरा अस्पताल फाइबर ,लोहे व लकड़ी से तैयार किया गया था। इस अस्पताल में ऑक्सीजन को सीधे बेड पर उपलब्ध कराने के लिए जिंदल कंपनी से अस्पताल तक विशेष लाइन डाली गई थी। अस्पताल तैयार करने का काम एक निजी कंपनी को सौंपा गया था। इसने रिकॉर्ड 20 से भी कम दिन के समय में इसे तैयार कर दिया था।
जब तक अस्पताल बनकर तैयार हुआ दूसरी लहर कमजोर पड़ने लगी। जिस कारण बहुत कम संख्या में मरीजों को यहां भेजा गया। पहले अस्पताल को 6 महीने अक्तूबर तक के रखने का फैसला लिया गया था। बाद में तीसरी लहर की आशंका के चलते इसे दो महीने बढ़ाया गया। इसके बाद तीसरी लहर आने पर इसे तीन महीने के लिए बढ़ाया गया। संवाद
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धरना दे रहे हैं कर्मचारी
अस्थायी संजीवनी अस्पताल में 100 से अधिक स्टाफ नर्स, सुरक्षा कर्मी, सफाई कर्मचारियों की अनुबंध आधार पर ज्वाइनिंग करवाई गई थी। कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बाद इन कर्मचारियों को हटा दिया था। तब से लेकर ये कर्मचारी दूसरे अस्पतालों में नियुक्ति की मांग को लेकर धरना दे रहे है।
मुख्यालय द्वारा अस्थायी संजीवनी अस्पताल को 31 मार्च से बंद करने के आदेश आए हैं। इस अस्पताल के लिए 31 मार्च डेडलाइन है। तय समय तक वहां से अस्पताल स्टाफ को हटा लिया जाएगा। - डॉ. रत्ना भारती, सीएमओ, हिसार।
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