हिसार। इस वर्ष अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि शुभ कार्यों के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। इस विशेष अवसर पर जिले भर में 200 से अधिक विवाह कार्यक्रम संपन्न होंगे। शादियों के लिए धर्मशालाओं, रेस्टोरेंट्स और बैंक्वेट हॉल्स की बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है।
अक्षय तृतीया को अनबूझ मुहूर्त कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि इस दिन किसी भी मांगलिक कार्य के लिए विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। विवाह, गृह-प्रवेश, नया व्यवसाय आरंभ करना, संपत्ति खरीदना जैसे कार्य इस दिन बिना किसी बाधा के किए जा सकते हैं।
खीर बनाकर भगवान विष्णु को लगाया जाता है भोग
अक्षय तृतीया पर घरों में मीठे व्यंजन खीर आदि बनाकर भगवान विष्णु को भोग लगाया जाता है। अक्षय तृतीया को अनबूझ मुहूर्त भी कहा गया है। इस दिन मांगलिक कार्य किए जाते हैं। इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग देखने या किसी पंडित से पूछने की जरूरत नहीं होती है। विवाह, गृह-प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करने जैसे कार्यों के लिए यह दिन अत्यंत उपयुक्त माना गया है। भगवान परशुराम का भी जन्म इसी दिन हुआ था। इस दिन बद्रीनाथ धाम के कपाट भी खुल जाते हैं।
अक्षय तृतीया पर सोने-चांदी की खरीदारी करना काफी शुभ होता है। लोग इस दिन खरीदारी करने के लिए बेसब्री से इंतजार करते हैं। अक्षय तृतीया को अनबूझ मुहूर्त भी कहा गया है। इस दिन जिले में 200 से ज्यादा शादियां होगी। -
पंडित देव शर्मा, कैलाश पंचांग के निर्माता