हिसार। अगर आपका बच्चा शुगर, अस्थमा और एनीमिया रोग से ग्रस्त है और बार-बार उल्टी व पेट दर्द के शिकायत के साथ स्कूल भी जा रहा है, तो सावधान हो जाइये। क्योंकि ऐसे लक्षणों से ग्रस्त बच्चों पर कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन तेजी से अटैक कर सकता है।
जिले में भले ही ओमिक्रॉन से ग्रस्त मरीजों का आंकड़ा शून्य है, लेकिन नए वैरिएंट का बच्चों पर अधिक खतरे को भांपते हुए स्कूल हेल्थ विभाग सतर्क हो गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने 11 मोबाइल वैन टीमों का गठन किया, जोकि जिले के 896 सरकारी स्कूलों में जाकर 170607 विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग कर काउंसिलिंग करेगी। प्रति मोबाइल वैन टीम में एक आयुर्वेदिक चिकित्सक, एक फार्मासिस्ट और एक एएनएम को शामिल किया है। 8 मोबाइल वैन ग्रामीण क्षेत्रों में जाएगी, जबकि दो वैन शहर के सरकारी स्कूलों को कवर करेंगी। अगले एक सप्ताह में यह अभियान शुरू हो जाएगा। संवाद
5 से 10 साल के लड़के, 10 से 16 उम्र की लड़कियों पर रहेगी नजर
मोबाइल वैन टीम में शामिल सदस्य पहले पहली से तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले 5 से 10 साल तक उम्र के लड़कों की काउंसिलिंग कर स्क्रीनिंग करेंगे। जबकि लड़कियों में 10 से 16 साल तक की उम्र की स्क्रीनिंग होगी, जोकि 5 से 10वीं कक्षा में पढ़ रही हैं। कारण यह है कि लड़कों और लड़कियों की इस उम्र में शारीरिक से मानसिक बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। इनका दैनिक दिनचर्या के कार्यों से लेकर खानपान पर पूरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए इनकी स्क्रीनिंग पहले की जाएगी।
शुगर : अगर खाना खाने से पहले बच्चे का शुगर 110 से ज्यादा और खाना खाने के बाद शुगर 140 के पार पहुंचता है तो वह बच्चा शुगर से ग्रस्त हो सकता है। खान-पान में असंतुलन और व्यायाम के अभाव में शुगर बच्चों को घेर सकती है।
अस्थमा : यदि बच्चे को ठंड, धुएं और खाने में किसी विशेष खाद्य पदार्थ से बार-बार एलर्जी होती है तो उसे अस्थमा कहा जाता है। कारण है कि हानिकारण तत्व और विशेष खाद्य पदार्थ जोकि सांस की नलियों को नुकसान पहुंचाते हैं वे नलियां बार-बार सिकुड़ने लगती है। यह अवस्था अस्थमा कहलाती है।
एनीमिया : अगर बच्चे में खून की कमी हो, जिससे बच्चे की शरीर में लाल रक्त कणिकाएं कम हो जाती हैं तो प्रतिरोधी क्षमता कमजोर पड़ने लगती है। जोकि आगे जाकर बच्चों में एनीमिया का कारण बनती है। अगर कोई बच्चा जंक फूड और बाजार के खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करता है तो एनीमिया होने का खतरा अधिक बढ़ता है।
अभिभावक इन बातों का रखें ध्यान
- बच्चे को संतुलित आहार के साथ न्यूट्रिशियन डाइट अवश्य दें, जिनमें हरी पत्तेदार सब्जियां अवश्य शामिल करें।
- दिन में एक बार दूध का सेवन बच्चे को जरूर करना चाहिए।
- समय-समय पर नाखून काटते रहना चाहिए, क्योंकि बड़े नाखून से अनेक प्रकार की बीमारियां मुंह द्वारा शरीर के अंदर प्रवेश कर जाती है, जोकि खतरे का कारण बनेगी।
- रोजाना बच्चे को नहाना जरूर चाहिए, ताकि शरीर को स्वच्छ रखना चाहिए।
- दिन में खाद्य पदार्थों में एक बार दही अवश्य शामिल करें।
- हाथ को क्रमानुसार स्टेप में धोना चाहिए।
- स्कूल में मास्क अनिवार्य लगाए और सामाजिक दूरी जितना संभव हो तो दूसरों से रखें।
- बच्चे को खुद की पानी की बोतल स्कूल में लाना चाहिए।
कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के लक्षणों की स्थायी पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन अगर बच्चा शुगर, अस्थमा और एनीमिया रोग से ग्रस्त है तो ओमिक्रॉन ऐसे बच्चे को तेजी से चपेट में लेगा। क्योंकि प्रतिरोधी क्षमता कम होने से बच्चा जल्द ही संक्रमण से ग्रस्त हो सकता है। इसलिए हमारी 11 मोबाइल वैन टीमें सरकारी स्कूलों में जाएंगी और विद्यार्थियों की स्क्रीनिंग करेंगी। - डॉ. अनामिका बिश्नोई, डिप्टी सिविल सर्जन, हिसार