फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Haryana: ईंट भट्ठों में कोयले की जगह जलेगी पराली, कागज, गत्ते व कप-प्लेट भी बनाए जाएंगे

Wed, 15 Feb 2023 08:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह उदयभान त्रिपाठी, अमर उजाला ब्यूरो, हिसार (हरियाणा)

सार

टीटीसी ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। 10 हजार मीट्रिक टन पराली का उपयोग होगा। इसके अलावा इससे तैयार पल्प से कागज, गत्ता, कप-प्लेट व डिस्पोजल प्लेट्स भी बनाई जाएंगी।
विज्ञापन
पराली - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हरियाणा के हिसार में सिरसा रोड स्थित उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण और परीक्षण संस्थान (टीटीसी) ने पराली के पैलेट्स व ब्रेकेट्स (कैप्सूल) बनाने की फैक्टरी लगाने का प्रस्ताव केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय को भेजा है। पैलेट्स व ब्रेकेट्स का उपयोग कोयले की जगह जलाने के लिए हो सकता है। इसके अलावा इससे तैयार पल्प से कागज, गत्ता, कप-प्लेट व डिस्पोजल प्लेट्स भी बनाई जाएंगी।

विज्ञापन


पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर संचालित इस फैक्टरी में युवा, विशेषज्ञ व उद्यमी प्रशिक्षण भी लेंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव मनोज आहुजा बीते 6 दिसंबर को हिसार आए थे। लाडवा गांव में पराली प्रबंधन के उपाय देखने के बाद सचिव ने टीटीसी के निदेशक को पराली प्रबंधन के नए उपाय खोजने का सुझाव दिया था।

निदेशक ने बताया कि टीटीसी परिसर में खाली पड़ी जमीन पर एक फैक्टरी लगाने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस फैक्टरी में मशीनों के जरिए पराली को छोटे-छोटे टुकड़े में काटने के बाद इसको प्रेस कर कैप्सूल में परिवर्तित कर दिया जाएगा। 10-25 एमएम व 70-100 एमएम गोलाई के इन कैप्सूल में उच्च ज्वलनशीलता होती है।
विज्ञापन


इसे ईंट भट्ठे में कोयले की जगह प्रयुक्त किया जाएगा। इस फैक्टरी को चलाने के लिए 10 हजार टन पराली की जरूरत होगी। इससे तैयार कैप्सूल की कीमत 9 रुपये प्रति किलो आएगी, जो कोयले से सस्ती होगी। इसके अलावा पराली से कागज, गत्ता, कप-प्लेट व डिस्पोजेबल खाने की प्लेट भी बनाई जाएंगी।

भविष्य की राह खोलेगी यह फैक्टरी
पीपीपी मोड में संचालित फैक्टरी में युवाओं और विशेषज्ञों के अलावा उद्यमियों के लिए भी प्रशिक्षण की सुविधा होगी। यहां आकर देश का कोई भी व्यक्ति पराली से बनने वाले विभिन्न उत्पादों को बनाने का तरीका सीख सकेगा। इसके अलावा फैक्टरी लगाने के लिए जरूरी उपकरण, वित्तीय प्रबंधन समेत अन्य कौशल भी सिखाया जाएगा। सबसे बड़ी खासियत यह है कि पराली से बना कैप्सूल जहां कोयले की कमी को पूरा करेगी, वहीं इससे बने कप व प्लेट मिट्टी में आसानी से मिल जाएगी, जिससे कि प्लास्टिक की समस्या का भी समाधान होगा।

किसानों को अनुदान नहीं, फसल जैसा दाम मिलेगा
इस फैक्टरी का संचालन पीपीपी मोड में किया जाएगा। मतलब सरकारी जमीन मशीनरी स्थापित होगी। परंतु इसे चलाने का अधिकार किसी प्राइवेट कंपनी को मिलेगा। कंपनी किसानों से 10 हजार टन पराली खरीदेगी। अभी तक किसानों से पराली खरीदने के लिए कोई सीधी व्यवस्था नहीं है। सरकार पराली नहीं जलाने वालों को प्रोत्साहन स्वरूप प्रति एकड़ एक हजार रुपये का अनुदान देती है। लेकिन, फैक्टरी लगने के बाद प्रति क्विंटल की दर से किसानों से पराली खरीदी जाएगी। जल्दी ही इसका रेट भी सरकार की तरफ से घोषित किया जाएगा। इस तरह किसानों को अनुदान नहीं बल्कि पराली का मूल्य मिलना शुरू हो जाएगा।

हमने केंद्र सरकार को फैक्टरी लगाने से संबंधित प्रस्ताव भेज दिया है। टीटीसी के पास फैक्टरी लगाने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। यह फैक्टरी स्थानीय किसानों के अलावा उत्तर भारत के राज्यों के युवाओं व उद्यमियों के लिए वरदान साबित होगी। -डॉ. मुकेश जैन, निदेशक टीटीसी हिसार

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें