आरटीआई में खुलासा : हिसार डिपो में 62 चालकों की हुई थी वेरिफिकेशन, 44 के लाइसेंस मिले थे फर्जी
संवाद न्यूज एजेंसी
हिसार। हिसार रोडवेज डिपो में अन्य राज्यों से बनवाए गए चालक लाइसेंस के आधार पर सरकारी नौकरी हथियाने के मामले में वेरिफिकेशन में फर्जी लाइसेंस साबित होने के बाद भी परिवहन मुख्यालय ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसका खुलासा जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई सूचना में हुआ है।
आरटीआई कार्यकर्ता बृजपाल सिंह परमार ने 27 अगस्त 2022 में हिसार डिपो महाप्रबंधक से आरटीआई के तहत परिवहन निदेशालय द्वारा 2018 में जारी पत्र का हवाला देते हुए अन्य राज्यों से बनवाए गए चालक लाइसेंसों की वेरिफिकेशन और की गई कार्रवाई से संबंधित जानकारी मांगी थी। लेकिन एसपीआईओ ने सूचना नहीं दी। इसके बाद 14 नवंबर 2022 को रोडवेज हिसार डिपो महाप्रबंधक से प्रथम अपील की गई। फिर भी जानकारी नहीं दी। 2 जनवरी 2023 को राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।
इसके बाद 31 जनवरी 2023 को राज्य सूचना आयोग ने हिसार डिपो महाप्रबंधक को नोटिस जारी किया और 31 अक्तूबर 2023 को राज्य सूचना आयोग ने सूचना देने के आदेश दिए। इसके बाद हिसार डिपो ने अन्य राज्यों से बनवाए गए 62 चालक लाइसेंसों की विभागीय जांच की वेरिफिकेशन रिपोर्ट दी। इसमें अधिकारियों की जांच में 18 चालकों के लाइसेंस सही मिले जबकि 44 चालकों के लाइसेंस फर्जी और रिकाॅर्ड नहीं होने का हवाला दिया गया। परमार ने बताया कि अकेले हिसार डिपो में अन्य राज्यों से फर्जी चालक लाइसेंस के सहारे लंबे समय से नौकरी करने और कुछ कर्मचारियों के सेवानिवृत्त होने के बाद भी परिवहन विभाग मुख्यालय ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि कुछ फर्जी चालक लाइसेंसों को तो हरियाणा में आरटीए स्टाफ से मिलीभगत कर रिन्यू भी कराया गया है। वहीं, आरटीआई कार्यकर्ता पुनीत कुमार की एक आरटीआई की सूचना में सिरसा डिपो में भी तीन चालकों का फर्जी लाइसेंस होने का खुलासा हुआ है।