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हमराही का जज्बा, पत्नी के निधन के बावजूद पहले पाठकों तक पहुंचाया अखबार, फिर किया अंतिम संस्कार

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साइकिल पर अखबार बांटते अमरनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : Hisar
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हिसार। अमर उजाला के हमराही 65 वर्षीय अमरनाथ का ड्यूटी के प्रति जज्बा और पाठकों के प्रति प्रेम इस कदर रहा कि अपनी पत्नी के निधन के बावजूद उन्होंने सोमवार को अखबार पाठकों के घरों तक पहुंचाया। इसके बाद अपनी पत्नी के अंतिम संस्कार की तैयारियां की और दोपहर बाद संस्कार किया गया।
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दरअसल प्रोफेसर कॉलोनी निवासी हमराही अमरनाथ एचएयू की नेहरू लाइब्रेरी से सेवानिवृत्त हैं और पिछले करीब दो दशक से पाठकों तक अखबार पहुंचा रहे हैं। हर रोज की तरह वह अखबार पाठकों तक पहुंचाने के लिए सुबह 4 बजे उठे। उनके साथ उनकी 63 वर्षीय पत्नी बिमला देवी उठ जाती हैं। सुबह वे अमरनाथ के लिए चाय बनाने के लिए उठी थीं और बाथरूम में गईं तो उन्हें दिल का दौरा पड़ने से वहीं गिर गईं और उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना पर अमरनाथ के परिजन भी आना शुरू हो गए, लेकिन इसके बावजूद अमरनाथ ने 5 बजे साइकिल उठाई और न्यूज एजेंसी पर पहुंच गए। वहां से अखबार लेकर रोजाना की भांति पाठकों तक पहुंचाए। उसके बाद घर पहुंचकर उन्होंने अपनी पत्नी के दाह संस्कार की तैयारियां कीं। दोपहर बाद बस स्टैंड के नजदीक ऋषि नगर स्थित श्मशानघाट में अंतिम संस्कार किया। अमरनाथ के दो पुत्र मनोज व पंकज हैं। अमरनाथ के साथी पवन मित्तल ने कहा कि अमरनाथ ने सदा ही अपनी ड्यूटी के प्रति वफादारी व ईमानदारी से काम किया है।

श्मशानघाट में पत्नी का अंतिम संस्कार करने पहुंचे अमरनाथ।- फोटो : Hisar

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