हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) में हरियाणा में फसलों में उन्नत पौध प्रजनन सामग्री के तेजी से उत्पादन के लिए हाई-टेक लैब का उद्घाटन शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने किया। उन्होंने कहा इस अत्याधुनिक सुविधा के परिणामस्वरूप राज्य के कृषि अनुसंधान परिदृश्य में बड़ा बदलाव आएगा। इससे फसलों की किस्मों को तेजी से विकसित करने में मदद मिलेगी।
कुलपति प्रो. बीआर कांबोज ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में फसल सुधार कार्यक्रमों को बहु-दिशात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके परिणामस्वरूप फसलों की उपज में स्थिरता या संभावित उपज की क्षति, जैविक और अजैविक तनाव में वृद्धि हुई है। अधिकांश फसलों की नई किस्म को जारी करने के लिए लगभग 10-12 वर्ष का समय लगता है। स्पीड ब्रीडिंग से 3 से 4 साल में ही किस्म जारी की जा सकेगा। हरियाणा की प्राकृतिक जलवायु परिस्थितियां गेहूं, बाजरा, ज्वार, चना, सरसों आदि के लिए एक से अधिक फसल प्रजनन चक्र लेने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। इसलिए बेमौसमी फसल लेने के लिए देश में दूर-दराज के स्थानों का उपयोग करना पड़ता है। अब हरियाणा में ही बेमौसमी फसल लेने में सुविधा होगी, जिससे प्रजनन चक्र कम होगा और समय भी कम लगेगा।
शिक्षामंत्री ने विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग में नवस्थापित माइक्रो मेट्रोलॉजी लैब का भी उद्घाटन किया। यह लैब फसलों पर जलवायु के प्रभाव का आकलन करने तथा फसलों पर कीड़ों व रोगों का तापमान, नमी व अन्य मौसमी घटकों का संबंध की जानकारी पर अनुसंधान करने व उनके निवारण में बहुत सहायक सिद्ध होगी। यह लैब फसलों पर मौसम के प्रभाव का आकलन करके भविष्य में होने वाली गतिविधियों के बारे में सचेत करेगी। लैब के साथ स्मार्ट ट्रेनिंग हाल भी बनाया गया है। इस अवसर पर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष कैप्टन भूपेंद्र, सोनाली फौगाट आदि मौजूद रहे।