डी प्लान के टेंडर में इस बार माइनस रेट घटकर आए हैं। माइनस 2 प्रतिशत तक आए ये रेट अब नगर निगम अधिकारियों को नहीं भा रहे हैं। अधिकारी कह रहे हैं कि जो रेट प्रचार में चल रहे हैं वही रेट आना जरूरी है। अब इसको लेकर नेगोसिएशन की तैयारी चल रही है। निगम की टेक्निकल ब्रांच ने इस बारे डीसी एवं नगर निगम कमिश्नर निखिल गजराज को लिखा है। बता दें कि डी प्लान के टेंडर के साथ सवा सात करोड़ के काम के रिकॉल हुए टेंडर भी खुले हैं। डी प्लान के रेट कम माइनस रेट में गए हैं, जबकि ये टेंडर 26 प्रतिशत माइनस तक गए हैं।
13 कार्यों का लगाया था टेंडर
निगम ने करीब 53 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले 13 कार्यों का टेंडर लगाया था। यह काम डी प्लान की ग्रांट से लगाए गए हैं। इन 13 में से 7 काम माइनस रेट घटकर आए हैं। इनमें से तीन काम के लिए सिंगल एजेंसी द्वारा आवेदन किए जाने को लेकर रिकॉल किए गए हैं।
माइनस रेट गुणवत्ता से समझौता
रिटायर्ड चीफ इंजीनियर सीबी श्योराण ने कहा था कि माइनस में टेंडर जाना गुणवत्ता से समझौता है। उन्होंने कहा था कि इन टेंडरों में अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत होती है। मगर यहां निगम के अधिकारी अधिक माइनस रेट अधिक आने से खुश हैं। माइनस रेट कम होने पर नेगोसिएशन करवाने के लिए कमिश्नर को लिखा गया है।
डी प्लान व सवा सात करोड़ के काम में से रिकॉल हुए टेंडर खुल गए हैं। अभी नेगोसिएशन के लिए कमिश्नर साहब से अनुमति ली जाएगी। जिन एजेंसियों के नाम टेंडर खुले हैं उन्हें नगोसिएशन के लिए बुलाया जाएगा। इस बार कई टेंडर घटकर माइनस रेट में आए हैं।
- रामजीलाल, एक्सईएन नगर निगम