डी प्लान के पिछली बार मंजूर किए गए 272 कार्यों में से 26 कार्य रद्द कर दिए गए। तकनीकी तौर पर नॉट फिजिबल होने के कारण इन कामों को हटा लिया गया। पिछले साल के बजट से 246 काम ही कराए जाएंगे, जिसमें 92 काम पूरे हो गए हैं।
डी प्लान के तहत वर्ष 2015-16 के बजट को लेकर खूब हंगामा हुुआ था। विधायकों ने अधिकारियों पर उनके काम सूची में शामिल न करने का आरोप लगाया था। पिछले बजट में कुल 272 कार्य मंजूर किए गए थे। अधिकारियों ने इन कार्यों के लिए विभागों को सूची भेजी तो 26 काम ऐसे पाए गए जिन्हें पूरा नहीं कराया जा सकता था। तकनीकी तौर पर इन काम के रिजेक्ट होने के बाद सूची में केवल 246 काम ही बचे। डीसी ने पिछले बजट के कार्यों की प्रोग्रेस रिपोर्ट तैयार कराई है। वित्तमंत्री कैप्टन अभिमन्यु के समक्ष यह रिपोर्ट रखी जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार अब तक 92 काम पूरे कर लिए गए हैं। 149 कार्य प्रोग्रेस में हैं। 5 काम अब तक शुरू नहीं किए जा सके। पिछले वित्तीय वर्ष के कुल 10 करोड़ 20 लाख रुपये के बजट में से 3.87 करोड़ ही खर्च हो सके हैं। 6.33 करोड़ बजट विभाग के पास उपलब्ध है। काम पूरा होने के बाद इसका भुगतान किया जाएगा। इन सभी विभागों को पिछले वित्त वर्ष के काम तीन महीने में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सबसे धीमी गति से काम नगर निगम में
काम करने की स्पीड में नगर निगम की गति सबसे धीमी है। नगर निगम को 2 करोड़ 13 लाख का बजट दिया गया, जिसमें निगम अब तक महज 54 लाख ही खर्च कर सका। निगम के पास 1 करोड़ 59 लाख का बजट बचा हुआ है। दूसरा नंबर एडीसी कार्यालय का है। एडीसी कार्यालय के पास 1.55 करोड़ का बजट बकाया है। सबसे अधिक काम नारनौंद नगर पालिका ने कराए। एमसी नारनौंद ने 50 लाख का बजट खर्च किया। एक्सईएन पंचायती राज ने 49 लाख, बीडीपीओ बरवाला ने 41 लाख का बजट खर्च कर लिया है।
पूछा 5 काम अब तक शुरू क्यों नहीं हुए
बीडीपीओ हांसी में पिछले वित्तवर्ष के तीन काम, एक्सईन पब्लिक हेल्थ हिसार का एक काम, एमसी नारनौंद का एक काम अब तक शुरू नहीं हो सका है। डीसी ने अब तक इन काम के शुरू न होने पर अधिकारियों से रिपोर्ट सहित पूरी जानकारी मांगी है।
यह काम हो सकते हैं डी प्लान में
डी प्लान में आंगनबाड़ी, पेयजल, शिक्षा, बिजली, पशुपालन देखभाल, सिंचाई, महिला एवं बाल कल्याण, पंरपरागत ऊर्जा, गली निर्माण, खेल, सामुदायिक भवन, स्ट्रीट लाइट के काम कराए जा सकते हैं। जनप्रतिनिधि अपने कार्यों की सूची अधिकारियों को सौंपते हैं। इसके बाद प्लानिंग ऑफिस संबंधित विभाग के जरिए इन कार्यों को पूरा कराता है।