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दो साल बाद फिर खतरे में मेयर की चेयर!

Mon, 29 Aug 2016 12:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
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नगर निगम - फोटो : Bureau
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भाजपा सरकार के करीब दो साल पूरे होने पर मेयर की चेयर एक बार फिर से खतरे में आ गई है। मेयर को कुर्सी से हटाने का एलान किए जाने के बाद शहर की राजनीति में फिर से गर्मी आ गई है। अब आने वाले दिनों में मेयर पद को लेकर गहमागहमी रहेगी।
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इस तरह की सार्वजनिक तौर पर मेयर को हटाने का एलान करने पर राजनीति से जुड़े लोग अपने अपने हिसाब से मायने निकाल रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में मेयर पर की गई टिप्पणी की दिन भर चर्चा रही। भाजपा की सरकार को बने हुए दो साल का समय हो गया। इसके बावजूद शहर के अंदर विकास कार्य नहीं दिख पा रहे। लावारिस पशु, सीवरेज, पेयजल आपूर्ति, कचरा उठाना, सफाई को लेकर पूरा ठीकरा मेयर के सिर फोड़ दिया गया है। दूसरी ओर मेयर शकुंतला राजलीवाला काम न होने के लिए प्रदेश सरकार को जिम्मेदार बता रही हैं। विकास कार्य न होने से नाराज होकर पार्षदों ने समीक्षा बैठक में हंगामा कर दिया था, जिसके बाद मेयर अन्य पार्षदों के साथ निगम में धरने पर बैठ गई थीं।

इतना आसान नहीं मेयर को हटाना
मेयर को कुुर्सी से हटाने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए। निगम में कुल 20 पार्षद हैं। अविश्वास लाने के लिए कम से कम 16 पार्षदों की जरूरत है। फिलहाल बीजेपी समर्थित पार्षद केवल पांच है। ऐसे में भाजपा को 11 अन्य पार्षदों के वोट अपने पक्ष में डलवाने के लिए राजी करना पड़ेगा। अगर मेयर अपने अलावा चार पार्षदों का समर्थन रख लेंगी तो उनकी चेयर को खतरा नहीं है। मेयर को उनके पद से हटाना कठिन है। नया मेयर बनाना आसान होगा। मेयर के हटने के बाद नया मेयर चुनने के लिए 11 वोट ही चाहिए।
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पानीपत से शुरू हुुआ अभियान
भाजपा की सरकार बनने के बाद प्रदेश में अब तक केवल पानीपत का मेयर बदला गया है। पानीपत के मेयर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया था। रोहतक में भी मेयर को हटाने की तैयारी चल रही है। रोहतक के बाद हिसार का नंबर आ सकता है।

बीजेपी सरकार बनते ही शुरू हुई थी सुगबुगाहट
वर्ष 2014 अक्तूबर में बीजेपी सरकार बनते ही मेयर की कुर्सी को लेकर सुगबुगाहट शुरू हुई थी। इसी के तहत कुछ पार्षद अपनी पार्टियां छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे। इनेलो के शहरी जिला अध्यक्ष रहे हनुमान ऐरन व उनकी पार्षद पत्नी रेेखा ऐरन ने बीजेपी का दामन थाम लिया था। पार्षद कर्मबीर ढिल्लो, प्रीतम सैनी व डॉ. महेंद्र जुनेजा ने भी बीजेपी का दामन थाम लिया था। पूर्व मंत्री हरि सिंह सैनी ने भी भाजपा से नजदीकियां बढ़ा ली थी। कुछ समय बाद मेयर को हटाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।


सरकार जितना फंड मुहैया करवा रही है उतने ही काम हो रहे हैं। अब मेयर को हटाने की बात कहने वाले सांसद साहब का यह अपना व्यू है। ये तो पार्षद जानते हैं कि मेयर शहर के विकास के लिए कितनी गंभीर हैं।
- शकुंतला राजलीवाला, मेयर, हिसार

वार्ड के अनुसार विकास कार्य हो रहे हैं। सरकार की कमी के कारण बजट नहीं मिल रहा। सरकार की ओर से बजट मिले तो काम कराए जा सकते हैं। अविश्वास प्रस्ताव आएगा तो समय बताएगा क्या होगा।
- डीएन सैनी, सीनियर डिप्टी मेयर, हिसार

शहर में विकास कार्य न होने के लिए सरकार जिम्मेेदार है। सरकार की ओर से नगर निगम को पूरा बजट नहीं दिया जा रहा। इस कारण काम लंबे समय से लटके हुए हैं। विधायक व सरकार की अधिकारियों-कर्मचारियों पर पकड़ नहीं है।
- भीम महाजन, डिप्टी मेयर, हिसार

मैं इस सवाल पर कुछ नहीं बोल सकता। आपने सुना होगा उन्होंने यह कहा था कि मेयर को हटाने के लिए सीपीएस कमल गुप्ता को कहा था पर इन्होंने इनकार कर दिया था। इस पर मैं अधिक कुछ नहीं कहना चाहता।
- डॉ. कमल गुप्ता, विधायक एवं सीपीएस, हरियाणा

जहां तक बात अविश्वास की है प्रशासन व सत्ता चाहे तो सब कुछ संभव है। विकास पर मेयर मैडम जो बोल रही हैं वो गलत है। सारे काम बजट से ही नहीं होते। बहुत से काम अधिकारियों से सही तालमेल बनाकर भी करवाए जा सकते हैं।
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- कर्मबीर ढिल्लो, भाजपा पार्षद, निगम हिसार
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