हिसार। अधिकारी की मोहर लगाकर फर्जी असेसमेंट (संपत्ति मूल्यांकन दस्तावेज) के मामले का पटाक्षेप हो गया। निगम के कर्मचारी ने ही यह फर्जी असेसमेंट बनाई थी। बुधवार को उक्त कर्मचारी नगर निगम आयुक्त के समक्ष पहुंचा और उसने अपनी गलती स्वीकार की, साथ ही माफी भी मांगी। उक्त कर्मचारी का पिछले दिनों तबादला हो गया था और वह फिलहाल किसी अन्य जिले में तैनात है। उधर, निगमायुक्त का कहना है कि मामले की जांच पूरी होने के बाद कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि शहरवासी हेमंत कुमार को अपने घर में बिजली का नया कनेक्शन लेना था। इसे लेकर उसने बिजली निगम में आवेदन किया तो वहां उससे नगर निगम की तरफ से जारी असेसमेंट मांगी गई। मगर नगर निगम ने उसे यह कहते हुए असेसमेंट देने से मना कर दिया कि वह सारा रिकॉर्ड ऑनलाइन हो चुका है तो वह वेबसाइट से अपने प्रॉपर्टी टैक्स के बिल की कॉपी निकालकर उसे बिजली निगम के जमा करवा दे। जब उसने इस बारे में बिजली निगम के कर्मचारी को बताया तो उसने हेमंत को नगर निगम की तरफ से 20 जनवरी को जारी असेसमेंट दिखाई। हेमंत ने मोबाइल से इसकी फोटो ले ली और वह मेयर गौतम सरदाना के पास पहुंचा। मेयर ने संबंधित अधिकारियों को मौके पर बुलाकर पूछा तो उन्होंने इस असेसमेंट को फर्जी करार दिया।
दोषी कर्मचारी की टेबल से गुजरी सभी फाइलों की होगी जांच
निगम अधिकारियों की मानें तो उक्त कर्मचारी निगम की अलग-अलग शाखाओं में तैनात रहा है। उसके कार्यकाल के दौरान उसकी टेबल से गुजरी सभी फाइलों की जांच करवाई जाएगी।
फर्जी असेसमेंट बनाने वाला कर्मचारी खुद ही मेरे पास आया और उसने अपनी गलती स्वीकार की है। अभी मामले की जांच पूरी नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद उक्त कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - प्रदीप दहिया, निगमायुक्त