बास (हिसार)। परिवार का सहारा बनने के लिए मेरा लाल रूस गया था...क्यों उसे मौत के मुंह में धकेल दिया। रूस में यूक्रेन के ड्रोन हमले में मारे गए मदनहेड़ी गांव के सोनू की मां के मुंह से बस यही सवाल बार-बार निकल रहा है। रोते-रोते उनकी आंखें पथरा गईं हैं। वीरवार को सांत्वना देने के लिए घर आने वालों का तांता लगा था। मां कमलेश और बहन पूनम, सुमन व प्रवीन की सिसकियां थमने का नाम नहीं ले रहीं थीं। 18 साल पहले पति को खोने वाली मां अपने छोटे बेटे को खोकर बुरी तरह टूट चुकी हैं।
कमलेश ने बताया बेटा कुछ कमाने का सपना लेकर रूस गया था, लेकिन उसे झांसा देकर रूसी सेना में भर्ती करा दिया। उसकी शादी के सपने संजो रही थीं, जो पलभर में बिखर गए हैं। सोनू की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि सोनू के पिता सतबीर का निधन करीब 18 साल पहले हो गया था। तब से घर की जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई थी। बड़ा भाई विकास पेट्रोल पंप पर मामूली वेतन पर नौकरी करता है जो घर खर्च के लिए काफी नहीं। सोनू वर्ष 2022 में वर्क वीजा पर सिंगापुर गया था जहां उसने नौ महीने तक नौकरी की, लेकिन स्थायी रोजगार न मिलने के कारण लौट आया। इसके बाद उसने विदेशी भाषा सीखने का फैसला लिया ताकि बेहतर नौकरी पा सके। दिल्ली के एजेंटों ने उसे रूस भेजने के लिए पांच लाख रुपये मांगे।
कर्ज लेकर गया विदेश
भाई अनिल ने बताया कि सोनू रिश्तेदारों और दोस्तों से पांच लाख रुपये उधार लेकर मई 2024 में एक साल के स्टडी वीजा पर रूस गया। वहां उसकी मुलाकात मध्यप्रदेश और राजस्थान के एजेंटों से हुई जिन्होंने उसे ढाई लाख रुपये महीना वेतन और पांच साल का वीजा बढ़ाने का झांसा दिया, लेकिन वहां हालात बिल्कुल उलट थे। सोनू और उसके साथियों को बंकर खोदने और सिक्योरिटी गार्ड का काम करने के लिए कहा गया। 10 अगस्त को उनके फोन छीन कर जबरन रूसी सेना में भर्ती कर दिया गया। सोनू ने आखिरी बार तीन सितंबर को घर फोन किया, उसके बाद से संपर्क टूट गया। परिवार को 19 सितंबर को उसकी मौत की सूचना मिली। बुधवार को जब शव भारत आया तो ताबूत के अंदर रूसी सेना की वर्दी भी मिली। ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि सोनू को शहीद का दर्जा दिया जाए। संवाद
शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त था
सोनू के रूसी सैनिकों के साथ का फोटो भी परिवार को मिला है जिसमें वह वह सेना की वर्दी में नजर आ रहा है। यह फोटो कब लिया गया इस बारे में परिवार को कोई जानकारी नहीं है। शव के साथ ताबूत में सेना की वर्दी भी भेजी गई है। उसका शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त था। शव के नाम पर केवल कंकाल ही बचा था। इस कारण उसके अंतिम दर्शन भी नहीं किए। - अनिल, सोनू का भाई
परिवार को आर्थिक मदद मिले
सोनू ने देश के बाहर रहकर संघर्ष किया, लेकिन धोखे का शिकार होकर जान गंवा बैठा। हरियाणा के कई युवा अभी भी रूस में फंसे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रूस सरकार से बात कर सभी युवाओं को सुरक्षित वापस लाना चाहिए। सोनू को शहीद का दर्जा दिया जाए और उसके परिवार को आर्थिक सहायता मिले।
- जस्सी पेटवाड़, विधायक, नारनौंद