हिसार नगर निगम में टैक्स ब्रांच की बड़ी लापरवाही सामने आई है। इससे घालमेल से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। दरअसल किस शहरवासी के प्रॉपर्टी का कितना टैक्स जमा हुआ है, कितना बकाया है और कितना अधिक भरा जा चुका है। इस बात का अभी तक निगम के पास कोई सबूत नहीं है। प्री ऑडिट के अधिकारी भी इस मामले को लेकर निगम अधिकारियों से खफा है। कर्मचारियों ने टैक्स लेकर कितना जमा किया है। इस पर अभी तक ऑडिट की मुहर तक नहीं है। यह लापरवाही पिछले छह साल से चल रही है। वर्ष 2010 के बाद आज तक टैक्स ब्रांच का ऑडिट ही नहीं हो पाया है। न पोस्ट ऑडिट तो न ही प्री ऑडिट। ऑडिट टीम के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित ब्रांच रिकॉर्ड ही नहीं उपलब्ध करवा रहा, जिसको लेकर कमिश्नर तक को रिक्वीजेशन भेजी जा चुकी है।
ठेका लेने वाली कंपनियों के सिर फूटता है ठीकरा
ऑडिट ब्रांच की मानें तो टैक्स ब्रांच के अधिकारी हर बार ठेका लेनी वाली कंपनियों के सिर ठीकरा फोड़ते हैं। टैक्स ब्रांच से जब भी ऑडिट का रिकॉर्ड मांगा जाता है तो कंपनी द्वारा पोस्टिंग न किए जाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है। ऑडिट ब्रांच इस बार बिना पोस्टिंग की रिपोर्ट लिए ठेके लेने वाली कंपनी का लाखों का बिल अटका सकती है।
पहले भी नकली रसीद बनाकर कर चुका है गड़बड़ी
ट्रैक्स ब्रांच में 2010 से पहले एक कर्मचारी नकली जीएट (रसीद) बनाकर गड़बड़ी करता पकड़ा गया था। सरकार ने उसे बर्खास्त कर दिया था। कई नकली रसीदें उसके पास मिली थी। लोगों से टैक्स के रुपये वह लेता रहा और फर्जी रसीद शहरवासियों को देता रहा।
जानिए ऑडिट का पहरा क्यों जरूरी
ऑडिट विभागों में हो रहे कार्यों पर नजर रखती है। कितना काम कहां पर हुुआ। उसकी पेमेंट ठेके के अनुरूप हुई। कर्मचारियों के हर बिल पर नजर रखना। एकाउंट ब्रांच पर निगरानी का काम ताकि अधिकारियों के साथ मिलकर कोई गड़बड़ी ना कर सके। टेक्निकल ब्रांच की एमबी बुक से मिलान करना की पेमेंट उसी के अनुरूप हुई या नहीं। वेतन से लेकर हर काम पर इस ब्रांच की नजर रही है। ऑडिट से पास होने के बाद ही काम पुख्ता माना जाता है। अगर कहीं ऑडिट की ऑब्जेक्शन लगी हो तो वहां कोई न कोई टेक्निकल या फाइनेंशियल गड़बड़ होती है।
ब्रांच इंचार्ज बोले कोर्ट में है रिकॉर्ड
टैक्स ब्रांच के इंचार्ज राजकुमार शर्मा ने कहा कि किसी मामले में रिकॉर्ड कोर्ट में है इसलिए रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हो रहा। हालांकि उन्होंने कहा कि मैंने पहली बार ब्रांच का काम संभाला है। एक एक यूनिट का इस बार पोस्टिंग काम जरूर होगा।
हम बार बार टैक्स ब्रांच को लिखकर दे चुके हैं। यहां तक कि कमिश्नर तक को भी लिखित में संबंधित ब्रांच द्वारा रिकॉर्ड उपलब्ध न करवाने बारे लिखा जा चुका है। इसके बावजूद भी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा। पूरा मामला पोस्टिंग पर अटका है। ब्रांच ने आज तक पोस्टिंग ही नहीं की। इसमें ऑडिट ब्रांच का कोई कसूर नहीं।
- प्रदीप पूनिया, रेजीडेंट एकाउंट ऑफिसर
यह है स्टेटस
- नगर निगम में कुल प्रॉपर्टी यूनिट 1 लाख 37 हजार
- अभी तक पोस्टिंग का काम - 44 हजार यूनिट
- टैक्स भरने वाले - 44 हजार प्रॉपर्टी मालिक
- कब से कब तक नहीं हुई ऑडिट - वर्ष 2010 से अब तक