हिसार। बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) इस बार गेहूं से 315 रुपये अधिक है लेकिन खरीद व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने से किसानों में असमंजस बना हुआ है। वर्ष 2026-27 के लिए बाजरे का एमएसपी 2900 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपये है। बाजरे की खरीद शुरू होने से पहले ही किसान चिंतित हैं कि फसल मंडी में लाने पर इसकी खरीद कहां और किस भाव पर होगी।
किसानों के अनुसार, सरकार ने अभी तक बाजरे की खरीद को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। आढ़ती भी फिलहाल बाजरे की खरीद नहीं कर रहे हैं। ऐसे में एमएसपी तय होने के बावजूद किसानों के सामने फसल बेचने की समस्या बनी हुई है। धान की खरीद को लेकर भी स्पष्ट आदेश नहीं आने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
किसान दिलबाग हुड्डा ने कहा कि धान और बाजरे की खरीद को लेकर केंद्र या राज्य सरकार ने अभी तक रुख साफ नहीं किया है। सरकार ने बाजरे का भाव 2900 रुपये तय किया है लेकिन आढ़ती खरीद नहीं कर रहे और सरकार की ओर से भी आदेश जारी नहीं हुए हैं। ऐसे में समझ नहीं आ रहा कि बाजरा लेकर मंडी जाएं तो फसल कहां बेचेंगे।
सरकार बाजरा खरीदना ही नहीं चाहती : सिवाच
पगड़ी संभाल चट्टा किसान संघर्ष समिति हरियाणा के प्रदेश महासचिव संदीप सिवाच ने कहा कि सरकार बाजरा खरीदना ही नहीं चाहती। पिछले साल सरकार ने मूंग का एक दाना भी नहीं खरीदा। 15 सितंबर से धान की खरीद शुरू होनी थी लेकिन अभी तक खरीद शुरू नहीं हुई है। संगठन कई बार प्रशासन के माध्यम से सरकार को ज्ञापन दे चुका है। किसानों में खरीद और भाव, दोनों को लेकर असमंजस है।
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राज्य सरकार की भावांतर भरपाई योजना के तहत बाजार भाव और निर्धारित एमएसपी के बीच के अंतर की भरपाई के लिए किसानों को आर्थिक सहायता दी जाती है। रकार ने अभी बाजरा या धान की खरीद को लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया है। बाजरे का एमएसपी 2900 रुपये प्रति क्विंटल है। खरीद के आदेश जारी होने के बाद ही व्यवस्था पूरी तरह स्पष्ट होगी। - अशोक कुमार, सुपरवाइजर, अनाज मंडी हिसार