हरियाणा सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत तीन क्लस्टर बनाए हुए हैं। हर क्लस्टर में अलग-अलग जिले शामिल हैं। क्लस्टर दो में अंबाला, करनाल, सोनीपत, हिसार, जींद, महेंद्रगढ़ और गुरुग्राम शामिल हैं। क्लस्टर दो का काम एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी को सौंपा गया था। जुलाई तक करीब दो लाख किसानों के खाते से प्रीमियम राशि काट ली गई थी। खरीफ की हर फसल का अलग-अलग प्रीमियम भरना होता है। इस बीच कंपनी ने फसलों का बीमा करने से मना कर दिया था। किसानों के पैसे बैंकों में जमा है, मगर सरकार की ओर से अब तक कोई दिशा-निर्देश नहीं जारी हुए हैं। बैंक भी सरकार की गाइडलाइन का इंतजार कर रहे हैं।
सर्व ग्रामीण बैंक ओबरा के किसान क्रेडिट कार्ड धारकों की प्रीमियम राशि खाते से काट ली गई है और बैंक ने उन किसानों को आईडी भी जारी नहीं की है। कई किसानों ने बैंक मैनेजर से बात की तो उन्होंने कहा कि पोर्टल बंद होने की वजह से आईडी जारी नहीं कर सके। वहीं कई किसान एचडीएफसी बैंक लोहारू से केसीसी धारक हैं और उन्हें आईडी जारी की जा चुकी है। - हवा सिंह, उपप्रधान, अखिल भारतीय किसान सभा, खंड बहल, जिला भिवानी।
किसानों को आशंका है कि आईडी के बिना कही बीमा क्लेम से वंचित न रह जाए। क्योंकि कपास की फसल गुलाबी सुंडी की चपेट में आने से बर्बाद हो गई है। - बाला देवी, सरपंच, गांव बिधनोई, खंड बहल, जिला भिवानी।
किसानों का बीमा क्लेम कटने के बाद आईडी जनरेट न होने की कई बार समस्या आई है। कोई किसान शिकायत लेकर आता है तो उसको बैंक अधिकारी के पास भेज देते हैं या हम अपने स्तर पर बैंक को किसान की शिकायत भेज देते हैं। - डॉ. सुखदेव कंबोज, कृषि उपनिदेशक, सिरसा।
इस बार हिसार कवर ही नहीं हो रहा है। हमें किसी कंपनी के पास पैसा ही जमा नहीं करवाना है। अब किसानों के खातों से कटे हुए पैसे का क्या करना है, इस बारे में सरकार की तरफ कोई गाइडलाइन आने के बाद ही आगामी कार्रवाई की जाएगी। -मनोज यादव, ब्रांच मैनेजर, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक, रावलवास खुर्द, हिसार।
हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने इस बारे में कहा, मैंने पहले भी कहा था कि कलस्टर -2 में जिन किसानों का प्रीमियम कट चुका था, उन किसानों की फसलों का बीमा राज्य सरकार करेगी। हिसार भी कलस्टर-2 में आता है। इसके लिए कार्रवाई जारी है। जल्द ही इस संबंध में दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए जाएंगे। वहीं, जिन जिलों में बीमा कंपनी ने किसानों की फसलों का बीमा किया हुआ है, वहां मुआवजा देने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की है। इससे कंपनी पीछे नहीं हट सकती।