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किसान भाव खुद तय नहीं करेगा तब तक हालात नहीं सुधरेंगे : बीरेंद्र सिंह

Sat, 24 Dec 2016 12:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
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चौधरी बीरेंद्र सिंह - फोटो : bureau
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केंद्रीय इस्पात मंत्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह ने कहा है कि स्वामीनाथन आयोग के भाव देने से भी किसानों का भला नहीं होने वाला। जब तक किसान अपनी फसल का भाव खुद तय नहीं करेगा तब तक उसकी हालत नहीं सुधरेगी। कृषि इकोनॉमिस्ट इस पर भी शोध करें कि किसानों ने उत्पादन 8-10 गुना बढ़ा दिया फिर भी उनकी हालत क्यों नहीं सुधरी।
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एचएयू में चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में पूर्व प्रधान मंत्री चौधरी चरणसिंह की जयंती पर आयोजित किसान दिवस पर किसानों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा कि बिचौलिए किसानों की फसल पर अधिकतर मुनाफा कमा लेते हैं।

किसान कृषि उत्पाद के साथ साथ अपनी फसलों का दाम भी खुद तय करना सीख लें तो उनकी हालत सुधरेगी। स्वामीनाथन के भाव से भी कोई अधिक अंतर नहीं पड़ने वाला। उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि के लिए कृषि वैज्ञानिकों व किसानों दोनों ने मेहनत की। कृषि इकोनॉमिस्ट इस पर भी रिसर्च करें कि किसानों की आर्थिक हालत में सुधार क्यों नहीं हुआ।
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उनको बुलाओ जो अच्छा नहीं कर रहे
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि अच्छा करने वालों को बुलाना तो ठीक है पर उन लोगों को जरूर बुलाओ जो अच्छा नहीं कर रहे। ऐसे किसानों को बेहतर काम करने के लिए जानकारी दें। दिल्ली के नजदीक होने का फायदा हरियाणा को होना चाहिए। यहां के किसानों को अच्छे दाम मिलने चाहिए।

खेती खत्म हुई तो बेरोजगारों की फौज सड़कों पर होगी
एचएयू कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि देश के किसानों तथा कृषि वैज्ञानिकों ने कृषि उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया है। यहां के किसानों के बेटे 11 प्रतिशत सैनिक हैं। यहां के किसानों के बेटे एशियाड, कॉमनवेल्थ, ओलंपिक में भी मेडल ला रहे हैं। देश में 55 प्रतिशत रोजगार खेती से है। खेती कम हुई तो देश में बेरोजगारों की फौज सड़कों पर आ जाएगी।

यह बोले सीपीएस
सीपीएस डॉ. कमल गुप्ता ने कहा वैज्ञानिक सफेद मक्खी जैसी समस्याओं पर रिसर्च करें। सफेद मक्खी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को 967 करोड़ रुपये का मुआवजा देना पड़ा। उन्होंने कहा कि दुबई की तरह पानी की बूंद बूंद का सही उपयोग करना सिखाएं।

अनुसंधान निदेशक डॉ. एसएस सिवाच, विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. प्रवीण पूनिया ने भी संबोधित किया। विश्वविद्यालय कम्यूनिटी रेडियो स्टेशन के परामर्शदाता डॉ. रामफल चहल ने मंच का संचालन किया। इस अवसर पर लुवास के कुलपति मेजर जनरल डॉ. श्रीकांत, हकृवि के पूर्व कुलपति डॉ. पीएस लांबा, किसान आयोग के चेयरमैन डॉ. रमेश यादव, भाजपा जिला अध्यक्ष सुरेंद्र पूनिया आदि उपस्थित थे।

इनको मिला सम्मान
हरभजन सिंह (अंबाला), राम प्रसाद (बावल, रेवाड़ी), सत्य प्रकाश (भिवानी), राजू (फतेहाबाद), ऋषिराज त्यागी (फरीदाबाद), जगपाल सिंह (झज्जर), जय भगवान (जींद), केपी सिरोही (कैथल), सुलतान सिंह (करनाल), वीरेंद्र सिंह (कुरुक्षेत्र), महेंद्र पाल सिंह (मंडकोला, मेवात), राजबीर (महेंद्रगढ़), जितेन्द्र मुल्लतानी (पिंजौर, पंचकूला), पलविंद्र सिंह (पानीपत), वीरेंद्र मलिक (रोहतक) तथा राजकुमार सदलपुर, हिसार को सम्मानित किया।

चुटीले अंदाज से लगवाए ठहाके
बीरेंद्र सिंह ने अपने 38 मिनट के भाषण में चुटीले अंदाज में बार बार ठहाके लगवाए। पहली बार उल्टी गंगा बही अधिक पैसे वाले गरीब लोगों के पास अपना धन जमा कराने पहुंचे। उन्होंने पैसे से पैसा खींचने पर एक लोककथा सुनाते हुए भी खूब ठहाके लगवाए।
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