विश्वकर्मा धर्मशाला में वीरवार को शांति सद्भावना को लेकर मीटिंग कर रहे समाज के कुछ जनसंगठन व 35 बिरादरियों के लोगों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीटिंग कर रहे जनसंगठन के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने हिंसा के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए मंथन करने व घायल व मृतकों के प्रति संवेदना वक्त करने के लिए दो मिनट का मौन रखने के लिए मीटिंग बुलाई थी। मगर प्रशासन ने उन्हें रोक दिया।
प्रशासन के अधिकारियों ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर मीटिंग रुकवा दी और धारा 144 का हवाला देकर कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया। इस दौरान लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों को खूब खरी खरी सुनाई। मौके पर पहुंचे तहसीलदार साहबराम बिश्नाई को लोगों ने कहा कि जाट समाज के लोगों ने प्रेस कांफ्रेंस कर ली, नागरिक मंच ने मीटिंग कर ली तब प्रशासन कहां गया था। हमारी बिरादरी के लोग जब भी कुछ करे उन्हें रोकने का प्रयास रहता है।
11 सदस्यीय कमेटी बनेगी, सीएम से मिलकर बताएगी असलियतविश्वकर्मा धर्मशाला में एकत्रित हुए जनसंगठनों के लोगों ने कहा की कुछ समय चली उनकी मीटिंग में फैसला हुआ है कि उनकी एक 11 सदस्यीय कमेटी का गठन होगा। यह कमेटी सीएम से मिलेगी। संगठन के लोगों ने कहा कि जब सीएम मनोहरलाल खट्टर ने रोहतक का दौरा किया तो स्थानीय प्रशासन उन्हें उस स्थान पर जानबूझकर नहीं लेकर गए जहां ज्यादा नुकसान था। यह कमेटी सीएम से मिलकर असलियत सामने लगाएगी और अधिक नुकसान वाले स्थानों को चिह्नित कर सही रिपोर्ट सीएम को देगी।
नुकसान का 25 प्रतिशत मुआवजा तुरंत प्रभाव से दे सरकारमीटिंग में जनसंगठनों में चर्चा हुई की प्रदेश भर के व्यापारी या अन्य वर्ग को आंदोलन के दौरान जितना नुकसान हुआ है उन्हें कुल नुकसान का 25 प्रतिशत मुआवजा राशि तुरंत प्रभाव से सरकार दे। ताकि पीड़ित व्यापारी इस राशि से थोड़ी बहुत राहत पाकर अपने कारोबार को पटरी पर ला सके।
1947 के दंगों से भयावाह स्थिति रही रोहतक कीमीटिंग में पहुंचे लोगों ने कहा कि भारत पाकिस्तान जब 1947 में अलग हुआ तब धार्मिक दंगे हुए थे उस वक्त भी ऐसी स्थिति नहीं थी जैसी रोहतक में हुई। उन्होंने कहा कि असल आरक्षण के हकदार तो हम हैं पहले सबकुछ पाकिस्तान में छोड़कर आ गए और अब यहां तहस नहस हो गया।
हमने कहा प्रशासन का नुमाइंदा बैठा दो हम गलत बात करें तो तुरंत रूकवा देना मीटिंगजांगिड़ महासभा के पदाधिकारी कुलवंत जांगड़ा ने कहा कि प्रशासन ने हमारी मीटिंग कैंसिल करवा दी। हम पर दबाव बनाया गया। हमने सद्भावना व शांति संदेश देने के लिए सामाजिक संगठनों के साथ मीटिंग की थी। हमने ये तक कहा कि प्रशासन का नुमाइंदा या सीआईडी मीटिंग के बीच बैठा दो हम अगर कोई गलत या ओछी बात करें तो मीटिंग रुकवा देना। गलत हो तो कानूनी कार्रवाई करना मगर प्रशासन ने एक नहीं सुनी।
प्रशासन एक गुट को कुछ नहीं कह रहा। वे लोग प्रेस कांफ्रेंस करें या फिर मीटिंग करें उनसे प्रशासन को कोई दिक्कत नहीं। हमारी मीटिंग होती है तो प्रशासन की बेचैनी बढ़ जाती है। हमारी मीटिंग प्रशासन व पुलिस ने दखलअंदाजी कर बीच में ही कैंसिल करवा दी।कुलवंत जांगड़ा, पदाधिकारी जांगिड़ ब्राह्मण महासभा