उधर एयरपोर्ट की सुरक्षा को लेकर बनाई गई चहारदीवारी भी इन वन्य जीवों को एयरपोर्ट परिसर में घुसने से नहीं रोक पा रही है। ये वन्य जीव चहारदीवारी के नीचे मिट्टी खोदकर आसानी से परिसर में घुस रहे हैं। जब एयरपोर्ट अथॉरिटी को इस खामी का पता चला तो उसने तुरंत इस पर संज्ञान लिया। अब चहारदीवारी के नीचे ईंट लगाकर उस जगह को भरा जा रहा है ताकि वन्य जीव यहां से एयरपोर्ट परिसर में न घुस सकें। चूंकि यह चहारदीवारी करीब 14 किलोमीटर लंबी है तो ऐसे में इस कार्य को पूरा करने में कम से कम दो से तीन माह का समय लगेगा।
एयरपोर्ट से उड़ान को लेकर अभी तक न तो किराया तय हुआ है और न ही फ्लाइट शेड्यूल फाइनल हुआ है। ऐसे में अभी तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि फ्लाइट की बुकिंग कैसे होगी और कितना किराया होगा। हालांकि प्रदेश सरकार की तरफ से प्रस्ताव तैयार किया गया है कि यहां से शुरू होने वाली उड़ान सेवाएं वीजीएफ (वायबल गैप फंडिंग) आधारित होंगी, जिससे यात्रियों को ज्यादा किराया नहीं देना पड़ेगा। फिलहाल हिसार से पहले चरण में अयोध्या, जम्मू, जयपुर, दिल्ली, अहमदाबाद व चंडीगढ़ के लिए हवाई सेवाएं शुरू की जाएंगी। बाद में नए रूट का विस्तार किया जाएगा।
उधर, एयरपोर्ट की पार्किंग में होने वाली प्रधानमंत्री की रैली को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। रैली स्थल की सफाई करवाई जा चुकी है। अब वहां पंडाल का सामान पहुंचना शुरू हो गया है। यहां पंडाल तैयार करने वालों के बैठने के लिए कुछ केबिन भी बनाए गए हैं। 12 अप्रैल तक रैली का पंडाल बनकर तैयार हो जाएगा और सुरक्षा एजेंसियां इसे अपने घेरे में ले लेंगी।
बीएंडआर के अधीक्षण अभियंता अजीत कुमार ने बताया कि चहारदीवारी के निर्माण पर 20.56 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसमें प्रत्येक पोस्ट के नीचे दो पाइलों का सेट (हर पाइल की गहराई 3 मीटर) और एक पाइल कैप (300 मिमी मोटाई) शामिल है। इसके ऊपर 125 मिमी मोटाई के दो पैनल रखे गए हैं, जिनकी लंबाई 4.200 मीटर और चौड़ाई 1.50 मीटर है।
यह कार्य पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज, चंडीगढ़ के वैध डिजाइनों के अनुसार किया गया है। भारत सरकार के ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (बीसीएएस) ने इस कार्य की जांच और सत्यापन भी किया है। डीजीसीए की तरफ से हर मापदंड पर जांच उपरांत खरा उतरने पर ही 13 मार्च को संचालन के लिए लाइसेंस प्रदान किया गया।
यहां जीएलएफ की जमीन होने और रिजर्व फॉरेस्ट के निकट होने के कारण चहारदीवारी के नीचे से जंगली जानवरों का आना-जाना सामान्य है, जिन्हें रोकने के लिए नागरिक उड्डयन विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार चहारदीवारी के नीचे खाली पड़ी जगह में दो फीट की ऊंचाई में चिनाई की जा रही है। जल्द से जल्द इस कार्य को पूरा कर दिया जाएगा।