हिसार। मानसून की बारिश में खेतों और आवासीय इलाकों में जलभराव से सबक लेते हुए सिंचाई विभाग ने अभी से इससे निपटने की कवायद शुरू कर दी है, ताकि अगले साल मानसून में बाढ़ जैसे हालात न देखने पड़ें। इसके लिए जिले में अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके नालों, नहरों, ड्रेन व जोहड़ों की पहचान की जाएगी। इसके साथ ही वर्तमान में चल रही ड्रेन की क्षमता बढ़ाने के लिए भी प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
जिले में नई ड्रेन बनाने की जरूरत होगी तो सिंचाई विभाग उस विकल्प पर भी काम करेगा। फिर कभी जलभराव न हों इसके लिए सिंचाई विभाग को इस परियोजना पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बार मानसून में बारिश के कारण जिले में बाढ़ जैसे हालात बन गए थे। जिले में करीब 6.32 लाख एकड़ भूमि में जलभराव के कारण किसानों को करोड़ों का नुकसान हुआ। 14 गांवों में तो अब भी करीब 14 हजार एकड़ भूमि में जलभराव है। इस पानी की निकासी के लिए दो सप्ताह का समय और लगेगा। इस वजह से करीब 10 हजार एकड़ में रबी फसल की बिजाई भी संभव नहीं दिख रही।
योजना छह माह में करनी होगी तैयार
सिंचाई विभाग की ओर से छह महीने में योजना तैयार कर मुख्यालय भेजी जाएगी। इसमें सभी बरसाती नाले, नहर, नदी, ड्रेन, जोहड़ों को चिह्नित किया जाएगा। इनके प्राकृतिक बहाव को बहाल करने के लिए कार्ययोजना बनाई जाएगी। योजना में ऐसे नाले, जोहड़ व ड्रेन को शामिल किया जाएगा जो किसी कारण बंद हो चुके हैं। चूंकि ऐसे स्थानों पर बाढ़, प्राकृतिक आपदा का खतरा सबसे अधिक रहेगा। ऐसे में इन जगहों को रेड लिस्ट में रखा जाएगा जहां संभव होगा ऐसे स्थानों को कब्जा मुक्त कराया जाएगा।
—-विभाग की ओर से प्राकृतिक जल स्रोतों तथा प्राकृतिक तौर पर पानी के बहाव को बहाल करने के लिए रिपोर्ट तैयार की जाएगी जिन नालों, ड्रेन पर कब्जा होगा उसे हटवा कर साफ किया जाएगा। भविष्य में बाढ़ जैसे हालात न बनें इसके लिए पूरी योजना तैयार की जाएगी। - आनंद श्योराण, कार्यकारी अधिकारी, सिंचाई विभाग
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ड्रेन की क्षमता बढ़ाने के प्रस्ताव दिए थे जिस पर उन्होंने सहमति दी है। भिवानी-हिसार ड्रेन की क्षमता बढ़ाई जाएगी जिसके लिए पहले चरण में 320 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। दूसरी ड्रेन व नालों को लेकर जो प्रस्ताव आएंगे उनको भी मंजूर कराया जाएगा। - रणबीर गंगवा, मंत्री, जनस्वास्थ्य विभाग