बस से आ रही थी शराब-सिगरेट की बदबू
घायल कमलप्रीत ने बताया कि रविवार को हम भ्रमण के बाद शाम 6 बजे बस में बैठे थे। दूसरे अंकल बस चला रहे थे। बस स्टार्ट करते ही उन्होंने स्पीड बढ़ा दी, सभी ने कहा था धीरे करो, लेकिन ड्राइवर ने नहीं मानी। उसने कहा कि मुझे सोमवार सुबह 7 बजे तक बस स्कूल में पहुंचानी है।कमलप्रीत कौर का कहना है कि जब बस में हिसार के लिए चले तो बस में शराब और सिगरेट की बदबू आ रही थी। जब शिक्षकों ने चालक से पूछा तो उसने कहा कुछ नहीं अभी बीड़ी पी है। बस को जो चालक चला कर लेकर गया था, उससे अलग चालक बस चलाने लगा। बस की गति अधिक होने पर उसे कई बार टोका। अध्यापिकाओं ने प्रिंसिपल के पास फोन कर इस बारे में बताया था। जब बस खाई में गिरी तो 10-12 पलटे खाते हुए वह एक पेड़ पर अटक गई। बस के अंदर सभी एक-दूसरे के ऊपर गिर रहे थे। चीखने-चिल्लाने की आवाज ही सुनाई दे रही थी। जब होश आया तो अस्पताल में थी। अस्पताल में देखा किसी का हाथ टूटा हुआ है किसी का पांव। किसी की आंख बाहर आई हुई है तो किसी के सिर में टांके लगे हैं। मुझे भी सात टांके लगे हैं और पांव में भी चोट आई है।
रास्ता बंद था तो चालक उस रास्ते क्यों ले गया
रविंद्र कौर के पिता लुधियाना निवासी हरभजन सिंह का कहना है कि जो चालाक बस चला रहा था, उसके पास कोई लाइसेंस नहीं था और बिना परमिट के बस को वहां पर नहीं ले जा सकते। स्कूल प्रशासन की तरफ से प्राइवेट बस चालक से संपर्क किया था उसने 65000 मांगे थे। रकम ज्यादा होने के कारण स्कूल बस को ही भेजा गया। जब रास्ता बंद था तो चालक उस रास्ते से बस को क्यों लेकर गया, क्योंकि चालक को रास्ते का पता ही नहीं था। जब सड़क तंग थी, उसके बावजूद बस की स्पीड अधिक थी। जिस कारण हादसा हो गया। उनका मानना है कि स्कूल प्रबंधन और चालक की लापरवाही के कारण है दुर्घटना हुई है। दोनों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। घटना के बाद अधिकतर लोगों के मोबाइल फोन और सामान नहीं मिला।
प्रिंसिपल को फोन पर कहा, झूठ क्यों बोला
रविंद्र कौर के परिजनों का कहना है कि देर रात को घर आने के बाद कमलप्रीत ने विरोध से डायरी निकाली और उसमें लिखे प्रिंसिपल के नंबर पर कॉल की। उसने कहा जब मेरी मां का देहात हो चुका था, तो मुझसे झूठ क्यों बोला गया। मुझसे कहा गया कि तुम्हारी मां जिंदा है, अब कहां है मेरी मां, बताओ।
सरकारी अस्पताल में नहीं थी कोई सुविधा
कमलप्रीत ने बताया कि वहां के सरकारी अस्पताल में मरीजों के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि जो गंभीर घायल थे उनको निजी अस्पताल में नहीं ले जाया गया, जिस कारण उनकी मौत हो गई। अगर समय रहते उन्हें निजी अस्पताल में ले जाया जाता तो शायद उनकी जान बच सकती थी।