पुलिस की ओर से पेश जांच रिपोर्ट को सिविल जज ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सुनील कुमार ने करीब 10 मिनट तक पढ़ा। सरकार की ओर से अभियोजन विभाग के सहायक जिला न्यायवादी मंदीप बड़क ने पक्ष रखा। ज्योति मल्होत्रा की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के जोगमणि शर्मा, नितिन कुमार व दीपक कुमार ने पक्ष रखा। न्यायाधीश ने सरकारी वकील की ओर इशारा कर पूछा, हां जी आप बताइए:
सरकारी वकील: जज साहब, ज्योति मल्होत्रा के मोबाइल-लैपटॉप की फॉरेंसिक रिपोर्ट 2-3 दिन में मिलने की उम्मीद है। इसी रिपोर्ट से पता लगेगा कि उसने पीआईओ से क्या-क्या जानकारियां साझा की हैं। इस संबंध में पूछताछ के लिए एक सप्ताह का रिमांड और मंजूर करें।
डीएलएसए वकील: ज्योति से पांच दिन तक पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने गहन पूछताछ की है। पांच दिन का रिमांड तो बहुत होता है। इस अवधि के दौरान मोबाइल और लैपटॉप की रिपोर्ट क्यों नहीं मंगवाई गई।
सरकारी वकील: हम रिपोर्ट जल्द से जल्द मंगाने के लिए लैब प्रशासन से लगातार संपर्क कर रहे हैं। रिपोर्ट आए बगैर जांच को पूरा नहीं किया जा सकता।
डीएलएसए वकील: ज्योति तो जांच में हर स्तर पर पुलिस से सहयोग कर रही है। हर सवाल का जवाब पुलिस को उपलब्ध करा रही है। उसके सारे वीडियो सोशल मीडिया पर हैं।
सरकारी वकील: ज्योति ने देश में कई राज्यों में जाकर वीडियो बनाए हैं। पाक सीमा से जुडे़ रणनीतिक महत्व के स्थलों पर भी गई है। इन राज्यों की पुलिस भी ज्योति से पूछताछ करना चाहती है। इसलिए कम से कम 7 दिन का रिमांड दिया जाए।
डीएलएसए वकील (जज से): पुलिस के पास ज्योति के रिमांड को बढ़ाने का कोई ठोस आधार नहीं है, ऐसे में सरकारी वकील के आग्रह को स्वीकार न किया जाए।
सरकारी वकील: जज साहब, सात दिन के रिमांड के बिना जांच पूरी नहीं हो सकेगी।
न्यायाधीश: सरकारी वकील रिमांड बढ़ाने के जो तर्क दे रहे हैं, उनके आधार पर 7 दिन बहुत हैं। ऐसे में 4 दिन का रिमांड और मंजूर किया जाता है।