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मय्यड़ से फिर शुरू हुआ महासंग्राम

Sat, 13 Feb 2016 02:08 AM IST
अमर उजाला हिसार / ब्यूूूरो
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राज्य और केंद्र ओबीसी कोटे में आरक्षण के लिए आखिरकार सरकार और प्रशासन की तमाम चेतावनियों को दरकिनार करते हुए अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मय्यड़ भगाणा रोड पर हिसार-दिल्ली रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। इस कारण कई ट्रेनों को रूट बदलने पड़े।
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हिसार व हांसी में कई ट्रेने घंटों खड़ी रही, जिसके कारण यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ट्रैक जाम के कारण सिरसा से गोरखपुर वाया दिल्ली जाने वाली ट्रेन, फाजिल्का से रेवाड़ी वाली ट्रेन का रूट बदला गया। उधर हांसी में रेवाड़ी से श्रीगंगानगर जाने वाली गाड़ी को रोकना पड़ा। यह ट्रेन 4 बजकर 18 मिनट पर हांसी स्टेशन पर आकर खड़ी हो गई। उधर भिवानी-हिसार रूट की सभी गाड़ियां रद्द कर दी गई हैं।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष हवासिंह ने एलान किया है कि वे तब तक ट्रैक से नहीं उठेंगे जब तक कोई जाट मंत्री या फिर भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला मौके पर पहुंचकर कोई ठोस आश्वासन न दे दें। रात साढे़े आठ  बजे तक लोग पटरियों पर बैठे थे और पूरा प्रशासनिक अमला आंदोलनकारियों की हर हरकत पर नजर रखे था।
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आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से पहले से ही निर्धारित रैली सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई। करीब साढ़े तीन बजे जाट नेेताओं की पर्दे के पीछे मीटिंग हुई। इसके बाद हिसार-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर बैठने का एलान किया गया। सैकड़ों की संख्या में महिला पुरुष रेलवे ट्रैक पर धरना लगाकर बैठ गए। एहतियात के तौर पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। सातरोड स्टेशन पर पुलिस तैनात रही, लेकिन जहां ट्रैक जाम किया उस स्थान से पुलिस काफी दूर खड़ी रही। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से एक से तीन किलोमीटर की दूरी बनाए रखी। हालांकि खुफिया पुलिस आंदोलनकारियों के ईदगिर्द फैली हुई थी।
सांसद सैनी को चुनौती, अब लेकर आए ओबीसी ब्रिगेडसमिति के प्रदेशाध्यक्ष हवा सिंह सांगवान ने बीजेपी सांसद राजकुमार सैनी को निशाने पर लिया। मंच से जाट नेता बोले अब कहां गए सांसद सैनी लेकर आ जाएं ओबीसी बिग्रेड। आरक्षण वे हर हाल में लेकर रहेंगे। इसी मांग को लेकर वे ट्रैक पर बैठ गए हैं। दम है तो सैनी अब अपनी ब्रिगेड लेकर आएं।
फ्लैश बैक- 24 नवम्बर 2006 में आरक्षण के लिए जाट जागृति अभियान की शुरुआत।- 13 सितम्बर 2010 को जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने मय्यड़ गांव में लगाया जाम। आंदोलन के दौरान लाडवा निवासी सुनील श्योराण की गोली लगने से मौत।- 6 मार्च 2013 को मय्यड़ में ही फिर से जाट आरक्षण आंदोलन की शुरुआत।
आरक्षण पर रार2 मार्च, 2014 आम चुनाव से पहले केंद्र की यूपीए सरकार ने जाटों को पिछड़ी जातियों की केंद्रीय सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी। इसके साथ ही जाटों को केंद्रीय नौकरियों में पिछड़े वर्ग के तहत आरक्षण मिलने का रास्ता साफ हो गया।1 अप्रैल, 2014 जाटों को ओबीसी आरक्षण देने के यूपीए सरकार के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका में कहा गया कि जाट पिछड़े नहीं है।17 मार्च, 2015सुप्रीम कोर्ट ने जाट आरक्षण के फैसले को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि जाति के आधार पर किसी को आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। साथ ही कहा कि जाटों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति बेहतर है इसलिए उन्हें आरक्षण की जरूरत नहीं है। 27 मई 2015हरियाणा में हाईकोर्ट ने बिश्नोई, जाट, जट्ट सिख, रोड और त्यागी समुदायों को विशेष पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल करने और उन्हें सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में 10 फीसदी आरक्षण का लाभ देने पर रोक लगा दी। इसके अलावा सामान्य जातियों को आर्थिक आधार पर मिलने वाले 10 प्रतिशत आरक्षण पर भी स्टे दे दिया था।
प्रदेश में 70 लाख जाटप्रदेश के आंकड़ों पर नजर डाले तो करीब 70 लाख जाट समुदाय की आबादी हैं। इसमें हिसार के अलावा भिवानी, जींद, रोहतक, सोनीपत, कुरूक्षेत्र आदि में ज्यादा जाट समुदाय के लोग हैं।
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