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348 दिन बाद फिर से रामायण-मय्यड़ रेलवे ट्रैक के पास धरने पर जाट

Mon, 30 Jan 2017 12:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/हिसार
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jaat Resevervation - फोटो : Bureau
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जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने 348 दिन बाद फिर से रामायण-मय्यड़ रेलवे ट्रैक के पास धरना शुरू कर दिया है। इस बार का धरना स्थल भी पिछली बार रेलवे ट्रैक से महज 100 मीटर से भी कम दूरी पर है। बीते साल 16 फरवरी को ट्रैक के साथ एनएच की ओर धरने पर जाट खुद बैठे थे। इस बार प्रशासन ने ट्रैक के दूसरी ओर एक खेत छोड़कर जगह उपलब्ध कराई है।
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जाट आरक्षण संघर्ष समिति के नेतृत्व में जाट समुदाय के लोग रामायण रेलवे ट्रैक के पास पहुंचे। जाट नेशनल हाईवे की ओर जा रहे थे। इस बीच फाटक बंद होनेे के कारण वाहन थम गए। डीआरओ ब्रह्मजीत अहलावत, एसडीएम अशोक बंसल, डीएसपी नरेंद्र कादयान बातचीत के लिए पहुंचे। अधिकारियों ने पूछा कि धरना कहां लगाओ पहले अनुमति ले लो। समिति के सदस्यों ने कहा कि हम नेशनल हाइवे तथा रेलवे ट्रैक के बीच में हिम्मत सिंह के खेत में धरने पर बैठेंगे। डीएसपी नरेंद्र कादयान ने कहा कि धारा 144 लगी है। वहां पर धरना नहीं देने देंगे। आप मय्यड़ स्टेडियम में धरना दे लो। समिति के प्रदेश महासचिव महेंद्र पूनिया ने इनकार करते हुए कहा कि हम रोड के करीब ही रहेंगे। एसडीएम अशोक बंसल ने कहा कि हम आला अधिकारियों से बातचीत कर लें आप इंतजार करो। आला अधिकारियों को फोन पर पूरी जानकारी देकर निर्देश मांगे। इसके बाद एसडीएम अशोक बंसल ने कहा कि ट्रैक से एक एकड़ छोड़कर आप खेत में धरने पर बैठ जाओ। समिति के सदस्यों ने पहले तो इनकार किया। बाद में समिति ने कहा कि हम किसी तरह का टकराव नहीं चाहते। इस कारण इस खेत में ही धरने पर बैठेंगे। एसडीएम ने मौके पर मौजूद पटवारी को बुलाया फिर खेत मालिक के बारे में जानकारी मांगी। पता लगा कि खेत सेठ मदन का है, जिसने बुआई के लिए सुरेश को दे रखा है। एसडीएम ने बातचीत कर खेत मालिक को धरना स्थल के लिए जमीन देने पर सहमत करा लिया। करीब दो बजे जाट समाज के लोग गेहूं के खेत में धरने पर बैठ गए। कुछ घंटे बाद धरना स्थल पर दरी पहुंची। धरना स्थल के करीब 150 मीटर दूर आरएएफ की कंपनी को तैनात किया गया है। जो रेलवे ट्रैक की सुरक्षा करेगी।

महिलाओं की संख्या रही कम
रविवार को करीब 300 से अधिक लोग धरना स्थल पर पहुंचे। धरने पर पहुंचने वालों में बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक रही। महिलाओं की संख्या बेहद कम थी। युवाओं की संख्या सामान्य रही। धरना स्थल तय होने के बाद युवाओं ने कुछ देर बाद ही सड़क से खेत के लिए कस्सी से खोदकर रास्ता तैयार कर दिया। समिति के सदस्यों ने कहा कि पहले दिन जगह फाइनल नहीं होने के कारण महिलाओं की संख्या कम रही। अब रोजाना धरना स्थल पर संख्या को बढ़ाया जाएगा।
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दलजीत पंघाल बोले अब धरने का तुक नहीं
हवा सिंह सांगवान गुट के जिला अध्यक्ष दलजीत सिंह पंघाल ने कहा इस समय आरक्षण के लिए धरना देने का कोई तुक नहीं। सरकार की ओर से आरक्षण दिया जा चुका है। अब तो कोर्ट से ही तय होना है। नौकरी की मांग सरकार मान चुकी है। निर्दोष युवाओं को रिहा करने की बात पर सरकार का सकारात्मक रवैया है। यशपाल मलिक लोगों को बहका कर चला जाता है। हरियाणा के भोले लोगों को वह हर बार यूज करता है। खुद कभी धरने पर क्यों नहीं बैठता।

आरक्षण आंदोलन को देखते हुए रोडवेज अलर्ट, बसों को वापस लौटने के आदेश
आरक्षण आंदोलन को देखते हुए रोडवेज अधिकारियों ने रोडवेज ड्राइवरों व कंडक्टरों को खतरा दिखे तो बसों को वापस लाने के आदेश जारी किए हैं। बस अड्डे पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी जीएम ने प्रशासन से सुरक्षा मुहैया करवाने की मांग की है। इसके साथ-साथ सभी कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द कर दी गईं हैं। कर्मचारियों को आंदोलन के दौरान अलर्ट रहने के आदेश भी दिए गए हैं। रोडवेज में करीब 700 कर्मचारी हैं, जिनमें से हिसार व हांसी डिपो के 460 कंडक्टर व ड्राइवर हैं। वहीं बसों की संख्या 208 है। इनमें से हिसार डिपो पर 162 बसें है तो हांसी डिपो पर कुल 46 बसें हैं। रोडवेज ने प्रशासन की मांग पर 13 और बसें सुरक्षा बलों को उपलब्ध करवाई हैं। अब कुल 20 बसें पुलिस को दी गईं हैं।

पिछले आंदोलन में हुआ था 1.25 करोड़ का नुकसान
पिछले आरक्षण आंदोलन में बसें न चल पाने के कारण रोडवेज को काफी नुकसान हुआ था। 12 फरवरी से 23 फरवरी तक चले आरक्षण आंदोलन में रोडवेज को करीब 1.25 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा था।

प्रशासन की मांग के अनुसार पुलिस को 20 बसें मुहैया करवाई गईं हैं। इनमें से 5 बसें वापस भेजी गई हैं। अगर प्रशासन की मांग आती है तो और बसें उपलब्ध करवाई जाएंगी।
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- खूबीराम कौशल, जीएम, रोडवेज हिसार
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