अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष कृष्ण किरमारा ने कहा है कि जाट आरक्षण की पहली चिंगारी मय्यड़ से ही फूटी थी। आरक्षण की पहली शहादत यहां होने के कारण लोगों की भावनाएं इस स्थान से जुड़ी हैं। इस कारण हम मय्यड़ में ही धरना देना चाहते हैं। समिति ने एक किसान के खेत को फाइनल किया है। जिसमें हरी फसल काटकर वहां धरना स्थल बनाएंगे। वहीं प्रशासनिक अधिकारी शनिवार को पूरा दिन जाट आरक्षण संघर्ष समिति का धरना स्थल जानने के लिए लगे रहे। डीसी के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने मय्यड़ में संभावित स्थलों का मुआयना किया। मय्यड़ के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया है।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से 29 जनवरी से शुरू किए जाने वाले धरना के स्थल की पहचान के लिए ही दौड़ते रहे। प्रशासन की ओर से बताई गई किसी भी जमीन को समिति ने धरने के लिए तय नहीं किया। इन स्थानों को अलग अलग कारण बताते हुए खारिज कर दिया। धरना स्थल फाइनल कराने के लिए डीसी की ओर से एक कोऑर्डिनेशन कमेटी भी बनाई गई थी। जिला राजस्व अधिकारी के नेतृत्व वाली इस कमेटी ने आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्यों के साथ कई बार विमर्श किया। समिति की ओर से देर रात तक एक ही जवाब दिया गया, जिसमें कहा गया कि धरना मय्यड़ के आसपास ही रहेगा। समिति के प्रवक्ता रामभगत मलिक ने बताया कि समिति रविवार सुबह ही धरना स्थल के बारे में बताएगी। धरना मय्यड़ के आसपास ही रहेगा। समिति ने मय्यड़ के आसपास 2-3 जगह चिह्नित कर रखी है। प्रशासन की ओर से बताई गई किसी जमीन पर सहमति नहीं बनी है।
प्रशासन को ऐसा भेजा जवाब
समिति जिला अध्यक्ष कृष्ण किरमारा की ओर से पत्र भेजकर धरना देने के लिए अनुमति मांगी। जिस पर प्रशासन ने पत्र लिखकर धरना स्थल की जगह के बारे में पूछा। समिति की ओर से जवाब आया कि मय्यड़ के आसपास।
समिति के लिए मय्यड़ 19 जिलों में सबसे खास
प्रदेश के 19 जिलों में अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से रविवार 29 जनवरी से धरना शुरू किया जाना है, जिसमें हिसार सबसे अहम है। इसका सबसे बड़ा कारण यह कि करीब सात साल पहले आरक्षण आंदोलन की चिंगारी मय्यड़ से ही फूटी थी। हर बार आंदोलन में मय्यड़ की खास भूमिका रहती है। इस कारण सरकार की पहली प्राथमिकता मय्यड़ पर फोकस होती है।
डीसी, एसपी पहुंचे मय्यड़
डीसी निखिल गजराज, एसपी राजेंद्र कुमार मीणा, जिला राजस्व अधिकारी ब्रह्मजीत अहलावत, ड्यूटी मजिस्ट्रेट जिला परिषद डिप्टी सीईओ सूरजभान, ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार साहब राम सहित अन्य अधिकारियों के साथ मय्यड़ गांव का निरीक्षण किया, जिसमें पहले धरना दिए गए स्थलों का मुआयना किया। बंद पडे़ पेट्रोल पंप, टोल प्लाजा सहित अन्य एरिया पर सुरक्षा प्रबंधों का जायजा भी लिया।
प्रशासन कर रहा डराने का प्रयास
जाट आरक्षण संघर्ष समिति के प्रदेेश प्रवक्ता रामभगत मलिक ने कहा कि प्रशासन धरने से पहले समिति पदाधिकारियों को डराने धमकाने का काम कर रहा है। यह पूरी तरह से गलत है। समिति जाट समाज के हक के लिए धरना दे रही है। प्रजातंत्र में हर किसी को अपनी बात रखना का हक है। प्रशासन की ओर से गांव के लोगों, सरपंचों, पंचों, युवाओं को डराया जा रहा है। लोगों को कई तरह के प्रलोभन भी दिए जा रहे हैं।
पटवारी निकालते रहे खेत मालिकों का ब्योरा
जिला प्रशासन ने टीम ने पटवारी के जरिए नेशनल हाइवे के साथ लगते खेत मालिकों की जानकारी जुटाई। इसमें जाट आरक्षण समिति को समर्थन देने वालों की पहचान करने का प्रयास किया। खुफिया विभाग की टीम भी ऐसे लोगों की जानकारी लेने में जुटी रही। गुप्तचर विभाग के काफी कर्मचारियों को गांव मय्यड़, भगाना, रामायण, खरड़ अलीपुर के आसपास तैनात किया है।