मय्यड़ में 14 दिन से आरक्षण की मांग को लेकर धरने पर बैठी अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति ने दोपहर सवा दो बजे धरना स्थगित कर दिया। धरने पर करीब 12 बजे दिल्ली से समिति के प्रदेशाध्यक्ष आजाद सिंह लाकड़ा पहुंचे।
इसके साथ जाट नेता सूबे सिंह ढाका व पंजाब से समिति के प्रदेश सचिव कुलदीप गोदारा मौके पर पहुंचे। उन्होंने धरने पर हुए आंदोलनकारियों को सरकार के साथ हुई बातचीत के आधार पर फैसला सुनाया। सवा दो बजे उनके फैसला सुनाने के बाद जिला अध्यक्ष कृष्ण किरमारा ने धरना स्थगित करने का एलान कर दिया। हालांकि धरना हटाने के बाद भी शाम तक पुलिस व अर्धसैनिक बल तैनात था।
सरकार के साथ मुद्दों पर बनी सहमति
जिला प्रधान कृष्ण किरमारा ने बताया कि सरकार के साथ जो बातचीत हुई वे मुद्दे दोहराए गए। धरना स्थल पर आजाद लाकड़ा ने ये फैसला बताया। इसके बाद धरना उठाया गया। सुरेवाला चौक पर भी इसके बाद धरना उठाया गया। आजाद सिंह लाकड़ा व उनकी टीम ने मौके पर पहुंचकर धरना स्थल पर बैठे समिति सदस्यों को दोनों पक्षों के बीच हुई सहमति के बारे में बताया।
अगस्त तक का समय
किरमारा ने कहा कि सरकार के पास दो महीने से ज्यादा समय है। अगस्त महीने तक सरकार की किसी तरह की लापरवाही रही तो 13 सितंबर को हिसार के मय्यड़ में सुनील श्योराण की शहादत के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर आगे की रणनीति पर फैसला लिया जाएगा।
11 मुद्दों पर सहमति जता दी थी। दो ढाई महीने का समय लगेगा। समिति व सरकार के बीच सहमति बन गई थी।
- रामभगत मलिक, प्रवक्ता, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति
इन मुद्दों पर बनी सहमति
- हाईकोर्ट में लंबित जाट आरक्षण मामले की हरियाणा सरकार गंभीरता पूर्वक पैरवी करे और उसे संविधान की नौंवीं सूची में डालने की प्रक्रिया शुरू करवाए।
- जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जेल में बंद निर्दोष लोगों को बाहर निकालने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
- शहीद हुए लोगों के परिजनों को मुआवजा और नौकरी।
- 5 जून को आंदोलन के दौरान जारी किए नोटिस रद्द हों और दर्ज केस वापस हो।
- वैंकया नायडू की अध्यक्षता में गठित कमेेटी के साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और जाट नेताओं की वार्ता निर्धारित की जाए।
- आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमे वापस करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
- आंदोलन के दौरान घायल हुए लोगों को मुआवजा दिया जाए।
- समितियों पर धरना प्रदर्शन करने की रोक हटाई जाए।
- राजकुमार सैनी की ओबीसी बिग्रेड द्वारा जाट समाज के महापुरुषों की मूर्तियों को खंडित करने वालों पर कार्रवाई।
- मांगों को पूरा करने की समय सीमा निर्धारित की जाए।
- केस वापसी व रिहाई में जाटों के साथ हो रहे सरकारी भेदभाव दूर हों। राज्य सरकार इसके लिए पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी गठित करे।