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आरक्षण नहीं मिला तो फरवरी में करेंगे दिल्ली कूच

Fri, 13 Dec 2013 07:01 PM IST
जींद/ब्यूरो
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केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण की मांग के समर्थन में शुक्रवार को जींद की जाट धर्मशाला में तीस से अधिक खापों की बैठक हुई। बैठक में फैसला लिया गया कि अगर केंद्र सरकार ने 23 दिसंबर तक आरक्षण देने के लिए अधिसूचना जारी नहीं की तो फिर आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। आरक्षण आंदोलन कैसे चलेगा इसको लेकर 25 दिसंबर को गुहला चीका (कैथल) में खापों की महापंचायत होगी।
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चौधरियों ने कहा कि अगर 23 दिसंबर तक आरक्षण दे दिया गया तो गुहला चीका की महापंचायत में केंद्र सरकार का आभार प्रकट कर दिया जाएगा। नहीं तो फिर आंदोलन के लिए तेवर तेज कर फरवरी के पहले सप्ताह में दिल्ली कूच किया जाएगा। चौधरियों ने कहा कि जाट आरक्षण लेकर ही अपने घरों को लौटेंगे।


बैठक की अध्यक्षता सर्वजाट सर्वखाप आरक्षण समिति के अध्यक्ष नफे सिंह नैन ने की। उन्होंने कहा कि हरियाणा में जाटों को आरक्षण मिले पूरा एक साल हो चुका है। लेकिन केंद्र सरकार जाटों को आरक्षण के मामले में टरका रही है। उन्होंने बताया कि डेढ़ साल पहले केंद्र में आरक्षण की मांग की जाती थी तो सरकार यह कहती थी कि पहले अपने राज्य (हरियाणा) में आरक्षण की व्यवस्था करवाओ।
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नैन ने कहा कि हरियाणा में आरक्षण मिल चुका है। लेकिन केंद्र सरकार अब बिना वजह आरक्षण की राह में रोड़े अटका रही है। उन्होंने कहा कि 13 सितंबर को दिल्ली में जंतर मंतर पर धरना दिया गया था। इसके बाद उसी शाम को हरियाणा-दिल्ली के टिकरी बॉर्डर पर जाटों ने राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर दस पर जाम लगा दिया गया था। यह जाम तभी खोला गया जब केंद्र सरकार की तरफ से आरक्षण देने का वायदा किया गया था।


समिति प्रवक्ता सूबे सिंह सैमाण ने बताया कि जींद में 2 अक्तूबर को खापों की महापंचायत हुई थी। जिसमें खापों ने केंद्र सरकार को ढाई महीने से अधिक का समय (23 दिसंबर) तक दिया गया था। उन्होंने कहा कि समय पूरा होने में अब दस दिन भी शेष नहीं बचे हैं। लेकिन केंद्र सरकार की तरफ से इस बारे में कोई पहल दिखाई नहीं देती है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नौकरियों में हरियाणा सरकार की तर्ज पर ही आरक्षण लेना जाटों का अधिकार बनता है। इस अधिकार को लेकर जाट रहेंगे, चाहे इसके लिए जाटों को कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।


कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला ने कहा कि आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार खाप पंचायतों के धैर्य की परीक्षा न ले। उन्होंने कहा कि जिस दिन खाप पंचायतें रोड पर उतरेंगी। उस दिन केंद्र सरकार को जाटों की हकीकत मालूम हो जाएगी। कंडेला ने कहा कि जाट अपना हक मांग रहे हैं। किसी दूसरे का हक छीन नहीं रहे। हक अगर बातों से नहीं मिलेगा तो फिर आंदोलन से लिया जाएगा।


बैठक में मौजूद खाप सदस्य
सर्वजाट सर्वखाप आरक्षण समिति हरियाणा के आह्वान पर आहूत की गई बैठक में ढांडा खाप से राजबीर, सोनीपत 360 से राजेंद्र खत्री, सरोहा खाप से रणधीर सिंह, चोपड़ा से अजमेर व अमृतलाल, चहल से सुरजीत, खटकड़ से दलेल, कंडेला से टेकराम, नैन से नफेसिंह नैन, मलिक से दारा सिंह, श्योकंद से कृष्ण, पूनिया से अमीर सिंह, ब्याण से सूबे सिंह, ग्रेवाल से तुलसी, दहिया से सुरेंद्र, मटोर से धूप सिंह, नौगामा से कुलदीप, बूरा से हरनारायण सिंह, झील से रामपाल, उझाना से मनफूल व रामस्वरूप, मय्यड़ से संदीप सरपंच, राठी से तसवीर सिंह, ढिल्लों से सुभाष, झोरड़ से विनोद और पाई से राजेंद्र अपनी खाप की तरफ से मौजूद रहे।


समलैंगिक पर फैसले का स्वागत
जींद। जाट आरक्षण पर तीस खापों की बैठक में समलैंगिकता पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का समर्थन किया गया। इस दौरान खाप चौधरियों ने यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी का विरोध किया। चौधरियों ने कहा कि गांधी परिवार ने सामाजिकता की भी सारी हदें ही लांघ दी हैं। गांधी परिवार को यह देश कभी माफ नहीं करेगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिकता को लेकर जो फैसला किया है। उसका गांधी परिवार विरोध कर रहा है। जो एकदम से गलत है। जो परिवार देश की राजनीति को पिछले दो दशक से नहीं समझ पाया। वह कैसे देश की सामाजिक परंपराओं और व्यवस्थाओं को समझेगा।
सूबे सिंह सैमाण, खाप चौधरी

अगर सोनिया गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के  फैसले के खिलाफ कानून में बदलाव करवाने की कोशिश की तो इसके  कांग्रेस को इसके राजनैतिक रूप से गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। समलैंगिकता व्यक्तिगत मामला तो जरूर है। लेकिन सामाजिक रूप से ठीक नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा न्यायालय देश में नहीं है। इसलिए गांधी परिवार को न्यायालय का सम्मान करना चाहिए।
राजेंद्र खत्री, प्रधान, सोनीपत 360 खाप

सरोहा खाप के रणधीर सिंह, मटोर खाप धूपसिंह, नौगामा के कुलदीप सिंह समेत अनेक खाप चौधरियों ने कहा कि गांधी परिवार देश की परंपराओं से खिलवाड़ न करे। अगर कानून बनाकर समलैंगिकता को वैध करार दिया गया तो फिर यह सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना हो जाएगी।
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