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Hisar News: डाबड़ा माइनर पर सड़क निर्माण के लिए जमीन की निशानदेही के निर्देश

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हिसार। डाबड़ा माइनर पर सड़क निर्माण बनाने का प्रोजेक्ट फिर ठंडे बस्ते से बाहर निकल आया है। लोकनिर्माण मंत्री रणबीर सिंह गंगवा खुद इस प्रोजेक्ट में रुचि ले रहे हैं। बीएंडआर, सिंचाई, वन व राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने सिंचाई विभाग को मौके पर जमीन की निशानदेही करवाने के निर्देश दिए हैं। इसका खर्च बीएंडआर वहन करेगा। निशानदेही की रिपोर्ट के आधार पर ही इस प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाया जाएगा। वहीं, अधिकारियों की मानें तो कब्जों या किसी अन्य वजह से रोड के निर्माण में अड़चन आती है तो यहां एलिवेटेड रोड की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।
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तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने वर्ष 2016 में एक रैली के दौरान डाबड़ा माइनर पर रोड बनाने की घोषणा की थी। बाद में अधिकारियों ने इस प्रोजेक्ट की फाइल को बंद कर दिया। समाजसेवी योगराज शर्मा के प्रयासों से इस प्रोजेक्ट की फाइल फिर से खुली और अधिकारियों ने कागजी कार्रवाई शुरू की, लेकिन वन विभाग की अनुमति न मिलने और मौके पर जमीन की निशानदेही न होने के कारण प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।
माइनर की जमीन पर कब्जे
माइनर की जमीन पर काफी लोगों ने कब्जे किए हुए हैं। कई कब्जाधारी कोर्ट में केस जीत चुके हैं। ऐसे में निशानदेही के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि कितनी जमीन पर कब्जे हैं और इनके कारण सड़क निर्माण में बाधा आएगी या नहीं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इस मामले को फिर से कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। निशानदेही करवाने के लिए इस साल जुलाई में नोटिस जारी किया गया था, लेकिन नहीं करवाई जा सकी थी।
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आज तक खंभे हटे न ही पेड़ कटे
मौके पर 11 केवी व 33 केवी की लाइन गुजर रही है, जिन्हें शिफ्ट किया जाना है। 11 केवी लाइन के लिए टेंडर अलॉट हुए एक साल का समय बीत चुका है, लेकिन निशानदेही न होने के कारण खंभों को शिफ्ट नहीं किया जा सका। इस लाइन में 100 से ज्यादा खंभे हैं, जिन्हें शिफ्ट किया जाना है। इसके अलावा मौके पर करीब 400 से ज्यादा पेड़ हैं, जिन्हें काटा जाना जरूरी है। इन्हें काटने से पहले वन विभाग से एनओसी लेनी जरूरी है। बीएंडआर करीब एक साल से वन विभाग से पत्राचार कर रहा है, लेकिन एनओसी नहीं मिली। उधर, वन विभाग ने सिंचाई विभाग से पेड़ों की एवज में 6.625 एकड़ जमीन मांगी है।

3.4 किलोमीटर लंबी होगी रोड

इस रोड की लंबाई 3.4 किलोमीटर होगी। तोशाम रोड से कैमरी रोड तक फोरलेन बनेगा, जिसकी लंबाई 2900 मीटर व चौड़ाई 11 मीटर होगी। रोड के बीच में जर्सी बैरियर लगाए जाएंगे। यह हिस्सा तारकोल से बनेगा। इसके दोनों तरफ बरसाती नाला भी बनेगा। वहीं, कैमरी रोड से राजगढ़ रोड के बीच का रोड टू लेन होगा, जिसकी लंबाई 600 मीटर व चौड़ाई साढ़े पांच मीटर होगी। इस हिस्से को इंटरलॉकिंग ब्लॉक से बनाया जाएगा।
दिल्ली रोड का विकल्प हाेगी यह रोड
इस रोड को दिल्ली रोड के विकल्प के तौर पर बनाया जाना प्रस्तावित है। वर्तमान में दिल्ली रोड पर वाहनों का काफी बोझ है। इस रोड के बनने से सेक्टर 9-11, मॉडल टाउन, सेक्टर 13, 16-17, पीएलए, जवाहर नगर, हाउसिंग बोर्ड, डिफेंस कॉलोनी के लोगों को फायदा होगा।

मंत्री के आदेश पर इस प्रोजेक्ट को लेकर चार विभागों के बीच बैठक हुई थी, जिसमें मौके पर निशानदेही करवाने का फैसला किया गया। चूंकि इस जमीन का मालिकाना हक सिंचाई विभाग के पास है तो निशानदेही का कार्य सिंचाई विभाग ही करवाएगा। - अजीत सिंह, एसई, बीएंडआर
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