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Hisar News: नौ साल में अनुसूचित वर्ग पर अत्याचार के मामले नौ गुना बढ़े, जिलास्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति के अध्यक्ष ने मांगी रिपोर्ट मांगी

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हिसार। जिले में पिछले नौ साल में अनुसूचित वर्ग के लोगों पर अत्याचार के केस 9 गुना बढ़ गए हैं। वर्ष 2016-17 में अनुसूचित वर्ग के खिलाफ अत्याचार के 26 केस दर्ज हुए थे, जिसमें पीड़ितों को 29 लाख 78 हजार 750 रुपये का मुआवजा दिया गया। वर्ष 2024-25 में इन केस की संख्या 214 तक पहुंच गई। इस साल पीड़ितों को करीब 3 करोड़ 6 लाख 93 हजार रुपये मुआवजा दिया गया।
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प्रदेश सरकार की ओर से अनुसूचित जाति के सदस्यों पर अत्याचार को रोकने के लिए अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत मदद की जाती है। इसमें एससी-एसटी के लोगों पर गंभीर चोट लगने, अस्थायी या स्थायी तौर पर दिव्यांग, दुष्कर्म, हत्या के केस में पीड़ितों को 85 हजार रुपये से लेकर 8.50 लाख रुपये की मदद की जाती है। जिलास्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में रखे गए आंकड़ों के अनुसार पिछले 9 साल में एससी-एसटी एक्ट के केस में 9 गुणा की बढ़ोतरी हो चुकी है। अनुसूचित वर्ग पर बढ़ रहे केस पर समिति के अध्यक्ष प्रदेश के सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री कृष्ण बेदी ने रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस बारे में रिपोर्ट मांगी है कि हिसार जिले में इतनी तेजी से एससी-एसटी के केस क्यों बढ़ रहे हैं।

जिले में अत्याचार के केस व मुआवजे का ब्योरा

वर्ष - मुआवजा - पीड़ितों की संख्या
2016-17 29,79,500- 26
2017-18 1,29,60,387- 94
2018-19- 1,45,65,000- 62
2019-20- 1,83,00,000- 104
2020-21 1,52,99,115- 138
2021-222,78,60,000- 271
2022-23- 2,69,93,750- 201
2023-24 2,13,76,250- 190
2024-25 -3,07,87,090214

अंतरजातीय विवाह की संख्या चार गुना
वर्ष 2023-24 में अंतरजातीय विवाह के 59 आवेदन विभाग को मिले थे। विभाग ने 14.75 करोड़ रुपये की मदद दी। वर्ष 2024-25 में अंतरजातीय विवाह की संख्या 254 पहुंच गई। विभाग की ओर से दंपती को 63.50 करोड़ रुपये की मदद दी गई। अंतरजातीय विवाह करने वाले दपंती को सरकार की ओर से 2.5 लाख रुपये दिए जाते हैं। इसमें से 1.25 लाख रुपये तुरंत दिए जाते हैं जबकि 1.25 लाख रुपये उनके बैंक खाते में तीन साल के लिए लॉक कर डाले जाते हैं।
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पंचायत को मिलती है प्रोत्साहन राशि
अनुसूचित वर्ग के लिए बेहतर काम करने वाली पंचायतों को प्रदेश सरकार की ओर से 50 हजार रुपये की मदद दी जाती है। जिस गांव में दो साल से एससी-एसटी का कोई केस दर्ज नहीं हो, उस पंचायत को प्रोत्साहन राशि दी जाती है। वर्ष 2023-24 में 6 पंचायतों को यह प्रोत्साहन राशि दी गई। वर्ष 2025-25 में केवल एक पंचायत को यह प्रोत्साहन राशि दी गई।

जिलास्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में कुछ मामले सामने आए हैं। अत्याचार के मामले अधिक होने पर जांच रिपोर्ट मांगी गई है। यह पता लगाया जाएगा कि अत्याचार के केस क्यों बढ़ रहे हैं। इन केस में कितने लोगों को सजा हो रही है। इस बारे में भी जानकारी मांगी गई है।
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- कृष्ण बेदी, सामाजिक एवं न्याय अधिकारिता मंत्री, हरियाणा
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