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Hisar News: कैसे सुधरेगी सरकारी स्कूलों की पढ़ाई...20.5 फीसदी शिक्षकों की कुर्सियां खाली, जिले में पीजीटी और टीजीटी के लिए 7,603 पद हैं स्वीकृत, 1560 पड़े हैं रिक्त

Wed, 08 Jul 2026 01:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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हिसार। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, नई शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने और विद्यार्थियों को बेहतर भविष्य देने के प्रशासनिक दावे धरातल पर दम तोड़ रहे हैं। शिक्षा विभाग की हाल ही में स्कूल ऑडिट ने सरकारी व्यवस्था की सबसे बड़ी कमजोरी को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक जिले के सरकारी स्कूलों में पीजीटी और टीजीटी शिक्षकों के 20.5 फीसदी खाली पड़े हैं। जिन शिक्षकों के भरोसे नौनिहालों का भविष्य संवरना है उनकी इस भारी कमी के कारण स्कूलों में पढ़ाई का स्तर गिरता जा रहा है।
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जिले में कुल 846 सरकारी स्कूल हैं। ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़ाें के अनुसार जिले में स्वीकृत पदों और तैनात शिक्षकों के बीच एक बहुत बड़ी खाई बन चुकी है। जिले में पीजीटी और टीजीटी के कुल 7,603 स्वीकृत पद हैं जिनमें से 1,560 पद खाली चल रहे हैं। सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में 2,845 स्वीकृत पदों में से 592 पद रिक्त हैं यानी 21 प्रतिशत विशेषज्ञ शिक्षकों की कुर्सियां खाली हैं। वहीं मिडिल और हाई स्कूलों में 4,758 पदों में से 968 पद खाली हैं जो कुल पदों का लगभग 20 प्रतिशत है।
एक कंधे पर दो विषयों का बोझ
प्राथमिक शिक्षा के बाद विद्यार्थियों की पढ़ाई का सबसे अहम दौर ही शिक्षकों की कमी से जूझ रहा है। कई स्कूलों में विज्ञान, गणित और अंग्रेजी जैसे मुख्य विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक वर्षों से उपलब्ध नहीं हैं। हालात इतने बदतर हैं कि एक ही शिक्षक को दो-दो विषयों या अतिरिक्त कक्षाओं की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। ऐसे में नई शिक्षा नीति के तहत गतिविधि आधारित शिक्षण, कौशल विकास, कॅरिअर मार्गदर्शन और डिजिटल शिक्षा जैसे नवाचारों का लाभ विद्यार्थियों तक कैसे पहुंचेगा।
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स्मार्ट क्लास तो है पर पढ़ाने वाला नहीं
अध्यापक संघ का कहना है कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं होते। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी, कमजोर विद्यार्थियों पर अतिरिक्त ध्यान, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियां भी उन्हीं के जिम्मे हैं। विभाग की ओर से अक्सर वैकल्पिक व्यवस्था या समायोजन की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है लेकिन अस्थायी व्यवस्थाएं कभी स्थायी समाधान नहीं हो सकतीं। सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च करके बनाए आधुनिक स्कूल भवन, स्मार्ट क्लास और डिजिटल सुविधाएं तभी प्रभावी होंगी जब कक्षाओं में पढ़ाने के लिए शिक्षक मौजूद हों।

गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त कर जल्द भरे जाएं पद
सरकारी स्कूल पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में शिक्षकों की ड्यूटी एसआईआर जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाने से विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। सरकार को प्राथमिकता के आधार पर इन रिक्त पदों को जल्द से जल्द नियमित भर्ती के जरिये भरना चाहिए। शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखकर केवल शिक्षण कार्य में लगाया जाए ताकि स्कूलों का शैक्षणिक स्तर सुधरे और बोर्ड परीक्षाओं का परिणाम बेहतर हो सके। - विनोद प्रभाकर, जिला सचिव, अध्यापक संघ।
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