सिटी थाना रोड पर नगर निगम की जीएलएफ की लैंड पर पार्किंग बनाने की प्लानिंग 42.59 करोड़ के भुगतान के बाद ही सिरे चढ़ सकती है। नगर निगम को जीएलएफ ने कलेक्टर रेट पर जमीन देने के लिए हरी झंडी दे दी है।
डायरेक्टर ऑफिस से नगर निगम में आई चिट्ठी में सरकार ने तुरंत प्रभाव से निगम से जवाब मांगा है। चिट्ठी में लिखा गया है कि नगर निगम इस संबंध में सहमति पूर्ण औचित्य रूल एंड रेगुलेशन के हिसाब से तुरंत प्रभाव से सरकार के पास भेज दें।
2 एकड़ 1 कनाल 12 मरले है जमीन
जीएलएफ (गवर्नमेंट लाइव स्टॉक फार्म) की सिटी थाना के सामने 2 एकड़ एक कनाल 12 मरले जमीन है। जीएलएफ ने इसे निगम को कलेक्टर रेट पर देने की सहमति जताई है। इस आधार पर इस जमीन की कीमत 42 करोड़, 59 लाख 20 हजार रुपये बताई है। अब निगम को फैसला करना है कि यह जमीन लेनी है या नहीं।
कहां से आएंगे 42 करोड़
निगम में इन दिनों चर्चाएं चल रहीं हैं कि आखिर गौ अभयारण्य के लिए जीएलएफ से 50 एकड़ जमीन खरीदने के लिए नगर निगम के पास 22 करोड़ रुपये नहीं हैं, तो पार्किंग की इतनी महंगी जमीन खरीदने के लिए 42 करोड़ से ज्यादा की पेमेेंट कहां से आएगी।
मल्टी स्टोरी पार्किंग शहर की जरूरत
शहर में बढ़ रहे वाहनों के जाम को देखते हुए यहां मल्टी स्टोरी पार्किंग की जरूरत है। हालांकि अभी तक इसके फायदे ज्यादा नहीं दिख रहे क्योंकि यह राजगुरु मार्केट व मुख्य मार्केट से काफी दूर है मगर भविष्य में यह शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को ठीक रखने के लिए बड़ी ही फायदेमंद प्लानिंग रहेगी।
हाउस में पास हुआ था एजेंडा
निगम हाउस की बैठक में जीएलएफ की जमीन पर पार्किंग व उपकेंद्र बनाने के लिए एजेंडा पास हुआ था। आरंभ में पुरातत्व विभाग की इसमें अड़चन नजर आ रही थी। मगर पुरातत्व विभाग की अड़चन भी दूर हो गई।
अमृत योजना में भेजा है इस प्रोजेक्ट को
नगर निगम अधिकारियों ने पार्किंग को डेवलप करने के लिए 20 करोड़ रुपये से ज्यादा प्रोजेक्ट बनाकर अमृत योजना में भेजा है। यह हाल ही की बात है। अगर प्रोजेक्ट में यह मंजूर हो जाता है तो निगम को कुछ हद तक राहत मिल सकती है।