विधायक सावित्री जिंदल के साथ डॉ. कमल गुप्ता की विधानसभा चुनाव में टिकट से पहले ही खींचतान शुरू हो गई थी। डॉ. गुप्ता को टिकट मिली और सावित्री जिंदल ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा तो दूरियां बढ़ती चली गईं। गुप्ता ने सावित्री जिंदल को महारानी कहकर उन पर जुबानी हमला किया। इसके बाद से दोनों ने एक साथ मंच साझा नहीं किया है।
जिंदल परिवार हिसार में भाजपा का चेहरा बनना चाहता है। दूसरी ओर डॉ. कमल गुप्ता नहीं चाहते हैं निर्दलीय विधायक भाजपा का चेहरा बनें। जिंदल परिवार ने विधानसभा चुनाव में काम कराने के नाम पर वोट मांगे हैं। उन्हें राजनीतिक ताकत नहीं मिलेगी तो लोगों के काम नहीं करा सकेंगे। काम नहीं करा पाएंगे तो लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है।