गुजवि के सेमिनार हॉल में पूर्व छात्र मिलन समारोह। हॉल में प्रवेश करने वाला हर शख्स ऐसे नजर दौड़ा रहा था, जैसे उनका कुछ खो गया हो। तभी सूट-बूट में एक शख्स हॉल मेें प्रवेश करता है, दो पल नजर दौड़ाने के बाद व्यक्ति तेज कदमों के साथ 10 कदम की दूरी पर खड़े दो अन्य लोगों की तरफ बढ़ता है। इस दौरान उसके चेहरे पर दौड़ रही मुस्कान की गति उसकी चाल से भी अधिक हो जाती है। इस बीच दोनों शख्स उसे देख लेते हैं और गले मिलते हैं।
सूट-बूट वाले प्रो. सत्य सुरेंद्र सिंगला को अपने 25 वर्ष पुराने दोस्त मिलते हैं। 22 साल बाद वे एक-दूसरे से मिले। अपने एक दोस्त को वो फिर से गले लगाते हैं और हंसते हुए कहते हैं, एसडीएम बनकर भूल गए तुम तो....। तभी राकेश संधू बोले, एसडीएम का पद तुम जैसे भाई से बड़ा नहीं है सत्य। समय की चाल और काम का बोझ व्यस्त रखता है। तुम जैसे दोस्तों को कैसे भुलाया जा सकता है। इसके बाद तीनों अपने यादों में खो जाते हैं। वो कक्षा, वो शिक्षक, वो हंसी-ठिठौली, वो खेल, वो साहित्य और कविताएं और न जानें क्या-क्या। छात्र मिलन समारोह में पहुंचे प्रो. सत्य सुरेंद्र सिंगला, शहर में ही इंपीरियल कॉलेज चला रहे हैं। दूसरे दोस्त राकेश संधू कालका में एसडीएम हैं और तीसरे दोस्त जयवीर नरवाल पंचकूला में प्लानिंग ऑफिसर हैं। तीनों ने गुुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही यहां दाखिला लिया और शनिवार को छात्र मिलन समारोह में मिले।
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तब कैंटीन भी नहीं थी, हम एक रेहड़ी को ही ले आए थे
जयवीर नरवाल ने बताया कि हम सब एक परिवार की तरह रहते थे। उस समय कैंटीन नहीं थी तो दिल्ली रोड पर गेट के पास चाय पीने जाते थे। हम वहां से एक रेहड़ी को अंदर ही ले आए थे और उसका नाम हमने मड कैफे रखा था। सुलतान नाम का व्यक्ति चाय और स्वादिष्ट पकौड़े बनाता था।
जाट कॉलेज के बीएड हॉस्टल में ठहराया
एसडीएम राकेश संधू ने बताया कि विवि में जो आज मुख्य गेट है, वहां से जाने का पहले रास्ता ही नहीं था। एक नाला गुजरता था। विवि में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को शुरू में जाट कॉलेज के बीएड हॉस्टल में ठहराया जाता था। धीरे-धीरे समय बीतने के साथ विवि में विकास होता गया।
उस दौर में बना दिया था रेजिडेंट विश्वविद्यालय
डॉ. सत्य सुरेंद्र सिंगला ने बताया कि राजनीतिक उठापटक का शिकार भी यह विश्वविद्यालय रहा। हमारे दौर में इसे रेजिडेंट विश्वविद्यालय बना दिया गया था। हम मास्टर ऑफ बिजनेस इकोनॉमिक्स में 30 विद्यार्थी थे, जो सभी आज अच्छी जगह अपना कार्य कर रहे हैं। आज 25 वर्ष के बाद विवि ने बहुत तरक्की कर ली है। हमने उन खाली जगहों को देखने की कोशिश की, जो टीचिंग ब्लॉक-1 के आसपास दूर-दूर तक फैली थी। पर सब कुछ बदल गया था, लेकिन आज भी यादें वही थीं।