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शहर के तीनों विश्वविद्यालयों का बजट 224 करोड़ बढ़ा, विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च पर होगा फोकस

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कृषि, पशुपालन और तकनीकी से संबंध शहर के तीनों का विश्वविद्यालयों के बजट में सरकार ने अप्रत्याशित बढ़ोतरी की है। तीनों विश्वविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर को विश्वस्तरीय बनाने और रिसर्च पर और अधिक फोकस करने के लिए इस बजट का प्रयोग होगा।
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प्रदेश के विवि में सबसे अधिक बजट लेने वाले चौधरी चरण सिंह हरियाणा विवि के बजट में इस बार 148 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी करते हुए 651 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। पिछले वर्ष करीब 503 करोड़ रुपये का प्रावधान था, लेकिन संशोधन के साथ मार्च तक का बजट अनुमान 537 करोड़ तक पहुंच गया। विश्वविद्यालय में कई नए विश्वस्तरीय प्रोजेक्ट के शुरू होने के कारण इनके बजट में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की गई है।
ये हैं एचएयू के बड़े प्रोजेक्ट
- कृषि विवि और किसानों का लगभग सभी विभागों से कोई न कोई संबंध है। इसके लिए पंचकूला में एक यूनिवर्सिटी का कोऑर्डिनेशन डिपार्टमेंट बनेगा।
- फिशरीज कॉलेज, इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल बिजनेस ऐंड एंटरप्रन्योरशिप और कॉलेज ऑफ बायो टेक्नोलॉजी शुरू किए जाएंगे।
- कृषि को टूरिज्म से जोड़ने और प्राचीन भारतीय कृषि एवं संस्कृति से लोगों को अवगत करवाने के लिए विवि में इसी वर्ष भव्य म्यूजियम का काम पूरा होगा।
- रैपिड ब्रीडिंग प्रोग्राम के तहत रिसर्च प्रोजेक्ट तेजी से पूरे होंगे। इसके लिए लैब तैयार की गई है। इससे जो रिसर्च छह वर्ष में पूूरी होती थी, वह दो वर्षों में ही पूरी हो जाएगी।
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- इनोवेशन सेंटर, एबिक सेंटर आदि की स्थापना की गई।
हम किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसानों को कोई भी समस्या हो, वो विवि में आएं। हम पूरे राज्य की कृषि समस्याओं को केंद्र में रखकर रिसर्च पर काम करेंगे। दूसरा यूथ को एग्रीकल्चर एंटरप्रन्योर बनाने का काम किया जाएगा। रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहतर बजट दिया गया। इसके लिए सरकार का धन्यवाद।
- प्रो. केपी सिंह, कुलपति, एचएयू
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पिछले वर्ष 85 करोड़ तक पहुंच गया था संशोधित बजट
गुजवि को पिछले वर्ष में मिले कुल संशोधित बजट से 10 करोड़ रुपये अधिक का प्रावधान इस बजट में किया गया है। विवि को 95 करोड़ का बजट मिला है, जबकि पिछली बार बजट अनुमान 50 करोड़ रुपये था, लेकिन बाद में विवि के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर 25 करोड़ का बजट और दिया गया। वहीं, 10 लाख रुपये शिक्षकों के एरियर आदि के लिए मिले। ऐसे में पिछले वर्ष संशोधित बजट 85 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
ये हैं विवि के प्रोजेक्ट
- विश्व स्तर पर विवि की साख बढ़ाने और विदेशी विद्यार्थियों की संख्या में इजाफा करने साथ ही उन्हें बेहतर सुविधाएं देने के लिए इंटरनेशनल हॉस्टल की स्थापना की जाएगी।
- विवि के कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए स्टाफ क्वार्टर का निर्माण।
- इनोवेशन सेंटर बनकर तैयार होगा। इसमें नए आइडिया पर काम करने के साथ ही युवाओं को एंटरप्रन्योर बनाने पर फोकस होगा।
- नए कोर्स शुरू किए जाने के साथ ही नए हॉस्टल के निर्माण का भी प्रस्ताव।
- रिसर्च को बढ़ावा देने के अलावा नए आइडिया को विकसित करने और स्कूली विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति प्रेरित करने के लिए प्रोग्राम चलाए जाएंगे।
हमारा फोकस विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं देने और रिसर्च को बढ़ावा देने पर है। इसके लिए हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं। नए कोर्स शुरू करने और कॉलेजों के जुड़ने के बाद बजट का बढ़ाया जाना विश्वविद्यालय की आवश्यकता थी। इसके लिए सरकार का धन्यवाद।
- प्रो. टंकेश्वर कुमार, कुलपति, गुुजवि
लुवास नहीं खर्च पाई पूरा बजट, 281 करोड़ रुपये मिले
लाला लाजपत राय पशु विज्ञान एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय संभवत प्रदेश का एकमात्र विवि होगा, जिसने सरकार द्वारा अनुमानित बजट को पूरा खर्च नहीं किया। नए संस्थान की स्थापना के लिए तेजी से चल रहे निर्माण कार्य के बावजूद इस विवि ने बजट का प्रयोग संयमित ढंग से किया है। इस विवि को पिछले वर्ष 215 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से लगभग 162 करोड़ ही खर्च हुए। वहीं, इस बार 281 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इसमें से 100 करोड़ का अनुदान विभिन्न तरह के निर्माण व अन्य कार्यों के लिए नाबार्ड की तरफ से दिया गया है। अत्याधुनिक एवं विश्वस्तरीय कैंपस निर्माण के लिए लुवास को नाबार्ड से 450 करोड़ रुपये मिलने हैं।
लुवास के ये हैं बड़े प्रोजेक्ट
- इंविट्रो फर्टिलाइजेशन लैब शुरू होगी। इसमें सेक्स सीमन तैयार किया जाएगा और केवल फीमेल प्रोडक्शन होगा, जिससे प्रदेश में अच्छी नस्ल की भैंस और गायों की संख्या बढ़ाई जा सकेगी।
- लुवास का नया कैंपस 1100 एकड़ में बन रहा है। प्रशासनिक भवन, डेयरी साइंस कॉलेज, इंस्टीट्यूट ऑफ पेरा वेटरनेरी साइंस और वीसी ऑफिस इसी वर्ष बनकर तैयार होगा।
- नए बजट से हॉस्टल, आवासीय क्षेत्र, शेड्स, अत्याधुनिक वेटरनेरी हॉस्पिटल, वेटरनेरी कॉलेज आदि का निर्माण किया जाएगा।
- लुवास में गो संरक्षण एवं संवर्धन सहित पशु नस्ल सुधार के कई बड़े रिसर्च प्रोजेक्ट पर काम होगा।
हम एक ऐसे विश्वस्तरीय विवि की स्थापना कर रहे हैं, जो प्रदेश के किसानों व पशुपालकों की दशा और दिशा बदल देगा। हमारे वैज्ञानिक पशु नस्ल सुधार सहित क्षेत्र के कई बड़े प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहे हैं। आने वाले समय में हमारा मकसद पशुपालकों की आमदनी में कई गुणा इजाफा करके प्रोफेशनल बनाना है। इसके लिए बजट के रूप में सरकार के सहयोग के लिए धन्यवाद।
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- डॉ. गुरदियाल सिंह, कुलपति, लुवास
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