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Hisar News: दरियों पर उकेरी विरासत, हुनर से निकली आत्मनिर्भरता की राह

Mon, 26 Oct 2026 11:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
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राखीगढ़ी महोत्सव में मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा को दरी भेंट करते राखी बाराह खाप प्रधान रतन श्योराण
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नारनौंद। हजारों साल पुरानी हड़प्पा सभ्यता की विरासत अब राखीगढ़ी की ग्रामीण महिलाओं के हुनर से दरियों में आकार ले रही है। अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव में प्राचीन सभ्यता की झलक समेटे इन दरियों ने पर्यटकों का मन मोह लिया।
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किसी ने बड़ी दरियां खरीदकर विरासत को अपने घर का हिस्सा बनाया तो किसी ने छोटी दरियों में राखीगढ़ी की यादें संजोईं। परंपरा के धागों से बुनी इस पहल न केवल नई पीढ़ी को ऐतिहासिक धरोहर से जोड़ा बल्कि ग्रामीण महिलाओं के हुनर को पहचान दिलाकर आत्मनिर्भरता की नई राह भी खोली।
जिला पार्षद दिनेश श्योराण के प्रयासों से 16 अक्तूबर को राखीगढ़ी के हॉस्टल में दरी बनाने का काम शुरू हुआ। इसके बाद 19 से 25 अक्तूबर तक महोत्सव में स्टॉल लगाकर महिलाओं और छात्राओं ने दरियां तैयार कीं। करीब 10 दिन तक चलीं इस गतिविधि में भकलाना आईटीआई की ज्योति सहरावत और माजरा प्याऊ आईटीआई की राकेशी देवी सहित कई छात्राओं ने भाग लिया। राखीगढ़ी निवासी बिमला, बीरमति और भतेरी ने उन्हें दरी बनाने की बारीकियां सिखाईं। महोत्सव के समापन समारोह में पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा को भी एक दरी भेंट की गई।
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गांव की महिलाओं ने सिखाया पारंपरिक हुनर
कार्यशाला में भकलाना आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान), माजरा प्याऊ आईटीआई और कॉलेज की छात्राओं ने हिस्सा लिया। मंजू, सीमा, अंतिम, सुमित, तनु, काजल, दीक्षा और कोमल सहित अन्य छात्राओं ने दरी बनाने की प्रक्रिया समझने के साथ अपने हाथों से दरियां तैयार कीं। इंटेक ऑर्गनाइजेशन और स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं भी इस पहल में सहयोग कर रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं की पारंपरिक कला को पहचान मिल रही है और छात्राओं को भविष्य में स्वरोजगार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।
15 वर्षों से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हैं दिनेश श्योराण
जिला पार्षद दिनेश श्योराण पिछले करीब 15 वर्षों से राखीगढ़ी की ग्रामीण महिलाओं को उनके हुनर के आधार पर आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास कर रहे हैं। उनका उद्देश्य महिलाओं को गांव में ही रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना है। उनका मानना है कि ग्रामीण महिलाओं के पास हुनर की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें उचित मंच और बाजार से जोड़ने की है। राखीगढ़ी महोत्सव में दरियों को मिली पसंद ने इस पहल को प्रोत्साहन दिया है।
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