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धरोहर : सिंधु सरस्वती सभ्यता का महानगर था राखीगढ़ी

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राखीगढ़ी में टीले नंम्बर एक पर खोदाई करते छात्र व पुरातत्व विभाग की टीम। संवाद - फोटो : Hisar
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जय कुमार
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नारनौंद। विश्व के मानचित्र पर अंकित राखीगढ़ी में चल रही खोदाई से एक बार से सिंधु सरस्वती सभ्यता के प्रमाण मिले हैं। पुरातत्वविदों की मानें तो यही वह स्थान है जहां से सिंधु व सरस्वती नदी निकलती थी, जिसके किनारे हड़प्पा सभ्यता व संस्कृति का महानगर राखीगढ़ी बसा हुआ था।
राखी गढ़ी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. संजय मंजुल की देखरेख में चल रही चौथी बार की खोदाई से ऐसी चीजें सामने आई हैं, जिससे राखीगढ़ी दो नदियों के किनारे बसने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं। अभी तक की खोदाई के दौरान तीन साइटों से अलग-अलग प्रकार की चीजें मिली हैं। इनमें कच्ची व पक्की ईंटों की दीवारें, भट्ठियां, चूड़ियां, मनकें, कीमती पत्थर व कंकाल मिले हैं। इनसे ये प्रमाणित होता है कि राखी गढ़ी हड़प्पा सभ्यता व संस्कृति का सबसे पुराना स्थल है। साथ ही यह भी पता चला है कि यहां से सिंधु नदी वह सरस्वती नदी बहती थी, जिसका वह लोग व्यापार के लिए भी इस्तेमाल करते थे। यही कारण है कि राखीगढ़ी को सिंधु सरस्वती सभ्यता के नाम से भी पूरी दुनिया में जाना जाता था। हालांकि अभी तक यह प्रमाणित नहीं हो पाया है कि खोदाई के दौरान जो कंकाल मिले हैं वह इन नदियों से पहले के हैं या बाद के। संवाद
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इन टिल्लों पर चल रही है खोदाई
राखीगढ़ी में अभी तक केवल 3 बार ही खोदाई हुई थी, लेकिन अब एक बार फिर राखीगढ़ी में चौथी बार खुदाई जारी है। अभी टीला नंबर 1, 3 व 7 पर खोदाई जारी है। टीले नंबर 3 पर हो रही पहली बार की खुदाई को लेकर खोदाई कर रहे छात्र व पुरातत्वविद काफी उत्साहित हैं। उन्हें उम्मीद है कि यहां से इतिहास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलेंगी।
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