नारनौंद। गांव मिलकपुर के मासूम वीरन को जन्मजात हृदय रोग से समय पर उपचार मिलने से नया जीवन मिला है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम ने स्वास्थ्य जांच के दौरान उसमें हृदय संबंधी असामान्यता के संकेत पहचाने।
इसके बाद उसे सब-डिविजनल सिविल अस्पताल नारनौंद भेजा गया जहां जांच में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि हुई। निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास रेफर किया गया। अस्पताल में आवश्यक उपचार के बाद वीरन की निशुल्क हृदय सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद उसकी हालत में सुधार है और अब वह स्वस्थ है। उपचार राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत निशुल्क होने से परिवार पर आर्थिक बोझ भी नहीं पड़ा।
बेटे को स्वस्थ देखकर परिवार के चेहरे पर लौटी खुशी
वीरन की बीमारी और उपचार को लेकर परिवार चिंतित था। सर्जरी के बाद स्वास्थ्य में सुधार होने पर परिजनों ने राहत की सांस ली। परिवार के लिए सबसे बड़ी राहत यह रही कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत उपचार और सर्जरी निशुल्क उपलब्ध कराई गई। इससे उन्हें महंगे इलाज के आर्थिक बोझ से राहत मिली।
18 साल तक के बच्चों की होती है स्वास्थ्य जांच
सीएमओ डॉ. राहुल बुद्धिराजा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच की जाती है। इसमें जन्मजात विकार, हृदय रोग, दृष्टि एवं श्रवण संबंधी समस्याएं, पोषण संबंधी कमियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान की जाती है। गंभीर बीमारी सामने आने पर बच्चे को आवश्यकता के अनुसार उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर किया जाता है। वहां जांच, उपचार, दवाइयां और जरूरत पड़ने पर सर्जरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
सीएमओ बोले- लक्षण दिखें तो देरी न करें:
सीएमओ डॉ. राहुल बुद्धिराजा ने अभिभावकों से बच्चों में दिखने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज न करने की अपील की। बार-बार बीमारी, सांस लेने में परेशानी, जल्दी थकना, कमजोरी या अन्य लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लें। उन्होंने कहा कि नियमित स्वास्थ्य जांच से कई गंभीर बीमारियों की शुरुआती स्तर पर पहचान हो सकती है। समय पर उपचार मिलने से बच्चों को स्वस्थ जीवन की ओर लौटने में मदद मिलती है।