स्वास्थ्य विभाग का एक अजीब कारनामा सामने आया है। विभाग ने एक ऐसे चिकित्सक को निलंबित किया है, जिसकी छह माह पहले मौत हो चुकी है। मृतक चिकित्सक पर ड्यूटी में लापरवाही बरतने और अदालत में पेशी के दौरान शराब पीने का आरोप लगाया है। विभाग ने इस आदेश की एक कॉपी हिसार सिविल सर्जन और दूसरी कॉपी नूंह सिविल सर्जन को भेजी है। साथ ही 15 दिनों में जवाबी कार्रवाई का जवाब भी मांगा है।
बता दें कि जिला नागरिक अस्पताल में तैनात प्रेम सिंह अहलावत इसी वर्ष चार जनवरी को किसी केस या मामले के चलते लघु सचिवालय स्थित सेशन जज एके सिंघल की अदालत में गए थे। उस दौरान सेशन जज ने चिकित्सक पर शराब पीने की आशंका जताई थी। सेेशन जज की तरफ से डॉ. प्रेम का मेडिकल करवाने के लिए सिविल सर्जन को पत्र भी भेजा गया था। इसके बाद सिविल सर्जन ने डॉ. प्रेम की मेडिकल जांच करवाने के लिए तीन चिकित्सकों का बोर्ड भी बनाया था, जिसमें डॉ. राजीव डाबला, डॉ. पूनम दहिया और डॉ. नीरज खटक शामिल थे। जब बोर्ड ने डॉ. प्रेम को मेडिकल जांच के लिए ब्लड सैंपल और यूरिन का टेस्ट देने को कहा तो डॉ. प्रेम ने साफ मना कर दिया। इस बारे में बोर्ड ने सिविल सर्जन व सेशन जज को अवगत कराया था। इसके कुछ दिन बाद डॉ. प्रेम का अचानक निधन हो गया, जिससे उनका मेडिकल नहीं हो सका था। इसके बाद अस्पताल प्रशासन की तरफ से बिना किसी जांच के लिए बोर्ड में शामिल तीनों चिकित्सकों को सस्पेंड कर दिया गया था। मगर विभाग की कार्रवाई का सभी चिकित्सकों ने विरोध किया था। इसे देखते हुए विभाग ने तीनों चिकित्सकों को फिर से बहाल कर दिया था।
वर्जन
इस मामले को पीएमओ कार्यालय देख रहा है। सारी कागजी कार्रवाई उनकी तरफ से ही की गई है। वो ही इस बारे में कुछ बता सकते हैं।
- डॉ. रत्ना भारती, सिविल सर्जन, हिसार