अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंचन माही की अदालत ने जन्म प्रमाण पत्र बनाने की एवज में रिश्वत लेने के जुर्म में स्वास्थ्य विभाग के क्लर्क को दो वर्ष का कारावास और चार हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
रांगड़ा मोहल्ला सफीदों निवासी प्रभजोत ने 18 अक्तूबर 2011 को सतर्कता विभाग को दी शिकायत में बताया था कि उसने अप्रैल 2011 में अपने, भाई दलजीत, बहन मनप्रीत के जन्म प्रमाण पत्रों के लिए सामान्य अस्पताल में आवेदन किया था। छह महीने तक जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र क्लर्क अमित कुमार चक्कर कटवाता रहा।
आखिरकार उसने प्रमाणपत्र बनाने की एवज में 4 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की। मामला 2400 में तय हो गया। शिकायत के आधार पर सतर्कता विभाग की टीम ने शिकायतकर्ता को पांच-पांच सौ के चार और सौ रुपये के चार नोट पाउडर लगाकर और ड्यूटी मजिस्ट्रेट द्वारा साइन करवाकर दिए। क्लर्क अमित कुमार ने शिकायकर्ता को पैसे देने के लिए निजी होटल में बुला लिया।
रिश्वत की राशि सौंपने के बाद शिकायकर्ता ने छापा मार दल को इशारा कर दिया। अमित की तलाशी ली जाने पर उसके कब्जे से रिश्वत की राशि बरामद हो गई और हाथ धुलवाने पर हाथ लाल हो गए। सतर्कता विभाग ने स्वास्थ्य विभाग के क्लर्क अमित के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। तभी से मामला अदालत में विचाराधीन था। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंचन माही की अदालत ने जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की एवज में स्वास्थ्य विभाग के क्लर्क अमित को दो वर्ष का कारावास तथा चार हजार रुपये की सजा सुनाई है।