हिसार। 16 जुलाई 2002 के दिन अक्षत स्वामी का जन्म होने पर परिवार में खुशियां आई थीं। ये खुशियां 16 दिसंबर को बेटे की मौत के साथ ही गम में बदल गई। जिंदगीभर 16 तारीख जहन में बसी रहेगी। 16 तारीख को खुशी मिली और 16 को ही परिवार पर दुख का पहाड़ टूटा। बेेटे का 21 साल 5 महीने तक का सफर था। जिंदगीभर अब उसकी यादें सताती रहेंगी। यह कहना है लेफ्टिनेंट अक्षत स्वामी के पिता प्रकाश स्वामी का।
शहर की गवर्नमेंट कॉलोनी में रहने वाले प्रकाश स्वामी ने बताया कि 10 जून 2023 को भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से पासिंग आउट परेड हुई। बेटा अक्षत स्वामी लेफ्टिनेंट बना था। इसके बाद बेटे की जांलधर छावनी में तैनाती हो गई। 14 दिसंबर को बेटे का फोन आया था। उसने पूछा था कैसे हो पापा। मैंने कहा सब ठीक है। बेटे ने कहा था 24 दिसंबर को कार लेकर आऊंगा। इसके बाद पांच महीने के लिए मध्यप्रदेश में मोऊ स्थान पर जाना है। इसके बाद, एक महीने के लिए कर्नाटक के बेलगांव जाना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि बेटे की ज्वाइनिंग के बाद मिलने के लिए गया था। उस समय कर्नल के साथ-साथ अन्य अधिकारी बेटे की तारीफ कर रहे थे। मुझसे बात होने के बाद अगले दिन अपनी मां से बात की थी। मध्यप्रदेश जाने के लिए बेटे की 7 जनवरी को फ्लाइट थी।
शनिवार सुबह 4 बजे सीईओ सहल सिंगला ने फोन कर हादसे की सूचना दी थी। जब वहां पहुंचे तो चिकित्सक बेटे को मृत घोषित कर चुके थे। उसके साथी कैप्टन युवराज का आईसीयू में उपचार चल रहा था। वहां जाने के बाद पता चला कि हादसे के बाद कैप्टन युवराज बेटे के ऊपर गिरा हुआ था। उन्होंने बताया कि बेटा पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहा। बस बेटे का सफर हमारे साथ यहीं तक का था, जो पूरा हो गया। बस उससे जुड़ी यादें रह गई हैं।
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भाई ने शनिवार को अपने पास बुलाया था
लेफ्टिनेंट अक्षत स्वामी के चचेरे भाई भानू स्वामी ने बताया कि भाई अक्षत के पास फोन किया था। फोन पर बातचीत के दौरान भाई ने कहा था कि शनिवार को मेरे पास जांलधर आ जाओ, यहां की सैर करवा दूंगा। 24 दिसंबर को हिसार जाना है और उसके बाद मध्यप्रदेश जाना है। क्या पता था कि मुझे वहां बुलाने वाला भाई अब कभी लौट कर नहीं आएगा। हर किसी से ऐसे मिलता था कि वह उसे पहले से जानता है। हमेशा हंसमुख रहता था। वहीं, चचेरे भाई मर्चेंट नेवी में कार्यरत नवीन का कहना है कि छोटा भाई मिलनसार था। उसकी क्षति को पूरा नहीं किया जा सकता।
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जवान की अंतिम यात्रा से नेताओं ने बनाई दूरी
लेफ्टिनेंट अक्षत स्वामी की अंतिम यात्रा में शहरवासी शामिल थे। जिला प्रशासन की तरफ से संपदा अधिकारी राजेश खौथ, मेयर गौतम सरदाना, पार्षद जयप्रकाश, पूर्व पार्षद मनोहर लाल, माटी कला बोर्ड के चेयरमैन ईश्वर, पर्वतारोही अनिता कुंडू शामिल रहीं। मिलगेट एरिया से शुरू हुई अंतिम यात्रा में काफी लोग शामिल हुए। हालांकि जवान की अंतिम यात्रा में कैबिनेट मंत्री डॉ. कमल गुप्ता, उकलाना विधायक अनूप धानक, बरवाला विधायक जोगीराम सिहाग सहित कोई नेता नजर नहीं आया।