अपने बेटे युवांश को गोद में लिए राजेश
हिसार। स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1 (एसएमए) से जूझ रहे 9 माह के युवांश की जिंदगी बचाने के लिए मदद के हाथ उठे हैं। इस बीमारी के इलाज के लिए युवांश को 14.50 करोड़ रुपये का इंजेक्शन लगाया जाना है। पुलिस विभाग के कर्मचारियों व अन्य लोगों की मदद से अब तक 3.5 करोड़ रुपये एकत्र हो चुके हैं। युवांश के पिता सिपाही राजेश को अभी 11 करोड़ रुपयों की और जरूरत है।
पुलिस विभाग के साइबर सेल फतेहाबाद में कार्यरत हिसार के गांव जाखोद खेड़ा निवासी कांस्टेबल राजेश का बेटा युवांश एसएमए से जूझ रहा है। उपचार के लिए करीब 14.50 करोड़ रुपये का इंजेक्शन स्विट्जरलैंड में मिलता है। राजेश ने बताया कि इस इंजेक्शन के लगाए जाने तक युवाश की सेहत में सुधार नहीं होगा। जब तक इंजेक्शन नहीं दिया जाता तब तक उसे एक दवा दी जा रही है, जिसकी कीमत करीब 6.50 लाख रुपये है। इसका असर 45 दिन तक रहेगा। 45 दिन में 14.50 कराेड़ वाला इंजेक्शन नहीं लगाया गया तो दोबारा से 6.50 लाख रुपये वाला इंजेक्शन लगाना पड़ेगा। युवांश को बचाने के लिए अभी 11 करोड़ रुपये और चाहिए। उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग से सबसे अधिक सहयोग मिला है। नौ जिलों के पुलिस स्टाफ से एक दिन के वेतन के हिसाब से मदद आई है। बेटे का जीवन बचाने के लिए इंपेक्ट गुरु फंड राइजिंग ग्रुप की ओर से फंड एकत्रित किया जा रहा है।
दो माह तक आम बच्चों की तरह सक्रिय नहीं था
राजेश ने बताया कि युवांश का जन्म 9 अक्तूबर 2024 को हुआ था। जब वह दो महीने का हुआ तब सामान्य बच्चों की तरह सक्रिय नहीं था। इस पर हिसार में हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाया। इसी साल मई में हिसार के ही निजी अस्पताल में दिखाया तो डॉक्टर ने एसएमए टेस्ट करवाया। 18 मई को आई रिपोर्ट में स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी टाइप-1 बीमारी की पुष्टि हुई।