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जन्म से एक पैर से दिव्यांग ज्योति ने पांच साल की उम्र में थामा था रैकेट

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हिसार। यदि आपके अंदर कुछ करने की काबलियत हो तो आपको आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। जन्म से एक पैर दिव्यांग होने के बावजूद महज पांच साल की उम्र में ज्योति ने रैकेट थामा और अपने रैकेट के दम पर आज इंटरनेशनल स्तर पर अपनी पहचान बनाई। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी ज्योति के पिता ने संघर्ष जारी रखा। बेटी को खेल में आगे बढ़ाने के लिए पिता ने पड़ोसी से रुपये उधार लिए तो मां ने बेटी को आगे बढ़ाने के लिए सपोर्ट किया।
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ज्योति ने हाल ही में बेंगलुरू में हुई नेशनल पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक हासिल किए हैं। ज्योति ने सिंगल में और मिक्स डबल्स में एक-एक गोल्ड मेडल हासिल किया है। ज्योति के पिता सत्यवान टैंकर चलाकर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं, वहीं माता सुमित्रा गृहिणी है।
ज्योति की बहन सोनिया ने बताया कि मंगलवार को गांव पहुंचने पर उसका स्वागत किया जाएगा। ज्योति का सपना वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने का है। इसको लेकर वह अब तैयारी शुरू कर देगी। ज्योति की बहन सोनिया ने बताया कि गांव में पहले कई लड़कियां बैडमिंटन खेलती थी। ऐसे में उन्होंने अपनी बहन को बैडमिंटन खेलने की बात कही तो ज्योति ने बैडमिंटन में ही अपना करिअर बनाने की ठानी और प्रैक्टिस शुरू कर दी। फिलहाल ज्योति हिमाचल प्रदेश में कपूर एकेडमी में बैडमिंटन का प्रशिक्षण ले रही है।
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बेटी की मेहनत रंग ला रही है। आज बेटी ज्योति ने पदक जीतकर न केवल गांव का नाम, बल्कि देश का मान बढ़ाया है। ज्योति की इस जीत से दूसरी बेटियों को भी खेल में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी। - सत्यवान, ज्योति के पिता
आज बेटियां बेटों से कम नहीं है। बेटियां हर क्षेत्र में परचम लहरा रही हैं। काफी खुशी है कि बेटी ने दो गोल्ड मेडल जीतकर देश का मान बढ़ाया। मुझे बेटी पर गर्व है। - सुमित्रा, ज्योति की माता
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ये रहीं ज्योति की उपलब्धियां
- वर्ष 2021 में इंटरनेशनल बैडमिंटन प्रतियोगिता में सिंगल में गोल्ड व डबल्स में कांस्य पदक
- वर्ष 2021 में यूथ गेम्स में सिंगल और डबल्स में रजत पदक
- वर्ष 2021 में नेशनल पैरा बैडमिंटन प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक जीते
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