खतरनाक वायरस ग्लैंडर्स की चपेट में आईं पांच में से शुक्रवार को सिर्फ एक घोड़ी को ही मारा जा सका। घोड़ी रखने वाला पशुपालक सिर्फ एक ही घोड़ी को लेकर पहुंचा था और उसने अन्य चार घोड़ियों को मरवाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले घोड़ियों के बदले मिलने वाली मुआवजा राशि बढ़ाई जाए और वो राशि घोड़ियों को मारने से पहले दी जाए। इसके बाद ही घोड़ियों को मारने दिया जाएगा। जिस एक घोड़ी को शुक्रवार को मारा गया, उसे धांसू रोड पर खाली पड़ी सुनसान जगह पर दफनाया गया है।
दूसरी तरफ पशुपालन विभाग ने उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को मामले से अवगत करवा दिया है। विभाग के निदेशक डॉ. डीएस संधू ने कहा कि पशुपालकों को समझने की जरूरत है कि ग्लैंडर्स खतरनाक वायरस है और इसमें रिस्क नहीं लिया जा सकता। शनिवार को पशुपालक घोड़ी लेकर आएगा तो ठीक है, वर्ना पुलिस बल के साथ घोड़ियों को सैनियान मोहल्ले से लाया जाएगा और सुनसान जगह पर ले जाकर आसान मौत दी जाएगी।
पशुपालक ने पांचों घोड़ियां लाने का वादा किया था
पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. डीएस संधू ने कहा कि पशुपालक ने वादा किया था कि शुक्रवार सुबह वह घोड़ियों को लेकर पहुंचेगा। उसे विभाग की तरफ से पांच घोड़ियों का ही नोटिस दिया गया था, लेकिन शुक्रवार सुबह वह केवल एक ही घोड़ी को लेकर पहुंचा। उन्होंने कहा कि पशुपालक को ऐसा नहीं करना चाहिए था। कुछ बात थी तो प्रशासन से बात की जा सकती थी। अब शनिवार को पुलिस बल के साथ घोड़ियां लाएंगे।
पशुपालक बोले एक घोड़ी के 25 हजार रुपये कम हैं, सैंपल भी नहीं लेने देंगे
घोड़ियों में ग्लैंडर्स बीमारी होने के बाद घोड़ी पालक भी इकट्ठा हो गए हैं। उन्होंने कहा कि एक घोड़ी की कीमत एक लाख रुपये से अधिक होती है, जबकि विभाग प्रति घोड़ी के लिए उन्हें केवल 25 हजार रुपये ही मुआवजा देगा। पिछली बार भी जब उनकी एक घोड़ी को मारा गया था तो डेढ़ साल में पैसा मिला था। ऐसे में उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि या तो उनकी घोड़ियों को मारने के बजाय इलाज किया जाए या उनकी मुआवजा राशि को बढ़ाया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो वे अन्य घोड़ियों के सैंपल भी नहीं लेने देंगे। बता दें कि विभाग को अब जहां पर घोड़ियों में ग्लैंडर्स वायरस मिला था, वहां से पांच किलोमीटर के दायरे में अश्व प्रजाति के सभी पशुओं के सैंपल लेने हैं।
यह है मामला
शहर के सैनियान मोहल्ले में एक पशुपालक की पांच घोड़ियों में ग्लैंडर्स मिला है। केंद्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार द्वारा पशुपालन विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में पुष्टि हुई है। इन घोड़ियों को निर्धारित वैैैज्ञानिक तरीके से मारा जाना था। ये वो घोड़ियां हैं, जिनका इस्तेमाल शादियों में दूल्हे को बैठाने के लिए किया जाता था। इस बीमारी के आने के बाद पशुपालन विभाग को अब पांच किलोमीटर के दायरे के अश्व प्रजाति के सभी पशुओं के सैंपल लेकर जांच करनी है।
क्या होता है ग्लैंडर्स
ग्लैंडर्स घोड़ों में पाया जाने वाला एक खतरनाक वायरस है, जिसका कोई इलाज नहीं है। इस बीमारी में घोड़ों को सांस लेने में तकलीफ होती है और उनका शरीर सूखने लगता है। नाक से खून बहना, शरीर पर फोड़े या गांठ आदि हो जाना भी इसके लक्षण हैं। यह बीमारी बरखेडेरिया मैलियाई नामक जीवाणु से फैलती है। एक घोड़े में यह बीमारी होने के बाद उसके साथ रहने वाले अन्य पशुओं में भी यह सांस, त्वचा, एक ही बर्तन में पानी पीने या चारा खाने आदि से तेजी से फैलती है।
मनुष्यों में भी आसानी से होता है इसका प्रभाव
ग्लैंडर्स से प्रभावित घोड़ों के संपर्क में रहने वाले लोगों में भी ग्लैंडर्स आसानी से आ जाता है। जो लोग घोड़ों की देखभाल करते हैं, उनको त्वचा, नाक, मुंह, सांस आदि के द्वारा संक्रमण हो जाता है। इंसानों में इस बीमारी के आने से मांसपेशियों में अकड़न, मांसपेशियों में दर्द, छाती में दर्द, सिरदर्द, नाक से पानी बहना आदि लक्षण हो सकते हैं।
पिछली बार पैसे देने में किन्हीं कारणों से दिक्कत हुई थी। भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार हम सोमवार को उनके खाते में 25 हजार रुपये प्रति घोड़ी के हिसाब से पैसा डाल देंगे। अगर वो घोड़ियां नहीं लाए तो पुलिस बल के साथ हमारी टीम जाकर घोड़ियां लाएगी। हम किसी भी हाल में रिस्क नहीं लेंगे।
- डॉ. डीएस संधू, निदेशक, पशुपालन विभाग, हिसार
ग्लैंडर्स रोग से पीड़ित घोड़ी को मारने के बाद दफनाते पशुपालन विभाग के चिकित्सक।- फोटो : Hisar