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Hisar News: भाटला सामाजिक बहिष्कार प्रकरण से जुड़े मामले में पांच दोषियों को दो-दो साल कैद

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हिसार। आठ साल पहले भाटला गांव में बहुचर्चित सामाजिक बहिष्कार प्रकरण से जुडे़ मारपीट के केस में शनिवार को एडीजे गगनदीप मित्तल की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए दो-दो साल कैद की सजा सुनाई। हालांकि शाम को सभी को जमानत पर रिहा कर दिया। अदालत ने सभी को जातिसूचक गालियां देने के (एससी-एसटी एक्ट) के आरोपों से बरी कर दिया।
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हांसी सदर थाना पुलिस को 16 जून 2017 को दी रिपोर्ट में भाटला निवासी अनुसूचित जाति के युवक राहुल ने आरोप लगाया कि 15 जून, 2017 को वह जयमल, विकास, कुलदीप, अमित और नरसिंह के साथ गांव में खोखा रोड स्थित जलघर के पास लगे हैंडपंप पर पानी लेने गया था। वहां गांव निवासी महेंद्र उर्फ अमित, सुनील, सुभाष, रविंद्र उर्फ सिकंदर और परवेश सहित तीन नाबालिग लड़के भी आए हुए थे। इस दौरान पानी लेने की बारी को लेकर झगड़ा हो गया। इस दौरान आरोपियों ने उन्हें बुरी तरह पीटा और जातिसूचक गालियां दी। पुलिस ने इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (भादसं) की धारा 147, 149, 323, 325 व एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1)(आर) के तहत मामला दर्ज किया था।अदालत ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद पांचों आरोपियों को दोषी करार देकर दो-दो साल कैद और सात-सात हजार रुपये का जुर्माना लगाया।

किस धारा में कितनी सजा सुनाई

अदालत ने भादसं की धारा 148 में एक साल कैद और एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 323 में छह माह कैद और एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 324 में एक साल कैद और एक हजार रुपये जुर्माना, धारा 325 में दो साल कैद और दो हजार रुपये जुर्माना और धारा 506 में दो साल कैद और दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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सुप्रीम कोर्ट में भी छह साल से चल रहा मामला

मारपीट के बाद ही भाटला में सामाजिक बहिष्कार प्रकरण हुआ और उस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर करीब छह महीने पहले 4 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम जांच के लिए हांसी आई थी। टीम में रिटायर्ड डीजीपी कमलेंद्र प्रसाद और वीसी गोयल के अलावा दो रिटायर्ड डीएसपी मीनाक्षी शर्मा और राजेंद्र पाल शामिल थे। कमेटी ने पुलिस और पीड़ित लोगों और गवाहों के बयान लिए। घटनास्थल का भी निरीक्षण किया। इस मामले में पीड़ित पक्ष के वकील रजत कलसन ने कहा कि इस प्रकरण में पुलिस ने जानबूझकर दोषियों की मदद की है। इस फैसले के खिलाफ वे हाईकोर्ट जाएंगे।
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