हिसार। प्राइवेट एजेंसियों की ओर से किसानों को सरसों का अच्छा दाम मिल रहा है। ऐसे में पहले दिन सरकार को फसल बेचने में एक भी किसान ने रुचि नहीं दिखाई। इसी कारण सोमवार को सरसों की सरकारी खरीद नहीं हो पाई। हालांकि मंडी में काफी दिनों से सरसों पहुंच रही हैं। सोमवार से हैफेड की ओर से सरकारी खरीद की जानी थी, मगर शाम तक एक भी किसान सरकारी रेट पर फसल बेचने नहीं पहुंचा।
सरसों का सरकारी खरीद रेट 5050 रुपये हैं। मगर प्राइवेट एजेंसियों ने 6100 से लेकर 6500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से खरीदी। मार्केट कमेटी के असिस्टेट सेक्रेटरी भरत सिंह का कहना है कि सोमवार को प्राइवेट एजेंसियों की ओर से 4211 क्विंटल सरसों खरीदी गईं। इस दौरान 267 किसान अपनी फसल लेकर मंडी में पहुंचे, लेकिन एक भी किसान ने सरकारी रेट पर फसल नहीं बेची।
मंडी में सफाई नहीं, शेड के नीचे भी कब्जा
मंडी में सफाई व्यवस्था का बुरा हाल हैं। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। वहीं शेड के नीचे आढ़तियों ने सामान रखकर कब्जा किया हुआ हैं। हालात यह है कि कई शेड के नीचे तो छोटी से लेकर बड़ी गाड़ियां तक खड़ी की हुई हैं। पियाऊं में पानी तक नहीं है। गौरतलब है कि हर बार मार्केट कमेटी की ओर से मंडी में किसानों को सुविधाएं देने के दावे किए जाते हैं मगर किसानों को कोई सुविधाएं नहीं मिल पाती।
पिछले साल भी सरसों की सरकारी खरीद नहीं हो पाई थी। प्राइवेट एजेंसियों की ओर से किसानों को फसल के अच्छे दाम मिलने पर इस बार भी सरकारी खरीद मुश्किल हैं।
- भरत सिंह, असिस्टेंट सेक्रेटरी, मार्केट कमेटी