हांसी। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज (एचसीएमएस) एसोसिएशन के आह्वान पर नागरिक अस्पताल के डॉक्टर हड़ताल पर रहे। इस कारण स्वास्थ्य विभाग ने नेशनल हेल्थ मिशन के तहत भर्ती किए गए डॉक्टरों की अस्पताल में ड्यूटी लगाई। अस्पताल में केवल डिलीवरी केस और आपातकालीन सेवाएं ही चालू रहीं। नागरिक अस्पताल सहित सीएचसी और पीएचसी के डॉक्टरों ने भी ओपीडी बंद रखी।
हड़ताल में शामिल डॉक्टरों ने ओपीडी बंद रखी। उन्होंने मरीजों का उपचार नहीं किया। इससे सैकड़ों मरीजों को परेशानी हुई। हड़ताल के कारण नागरिक अस्पताल में आंख, दांत, गर्भवती की जांच, बुखार, खांसी, जुकाम, सांस सहित अन्य बीमारियों की ओपीडी नहीं हुई। सुबह नौ बजे जब मरीज अस्पताल में पहुंचे तो केबिन में डॉक्टर नहीं मिले।
अपना उपचार करवाने आए मरीज बिना दवा लिए व चेकअप करवाए लौट गए। डॉक्टरों ने सरकार को चेतावनी दी। कहा कि उनकी मांग पूरी नहीं हुईं तो हड़ताल आगे भी बढ़ सकती है। इससे पहले 27 दिसंबर को भी नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों ने हड़ताल की थीं। डॉक्टरों ने कहा कि अब अगर इसके बाद भी सरकारी डॉक्टरों की मांग पूरी नहीं की गई तो आगामी रणनीति बनाकर बेमियादी हड़ताल की जाएगी। हड़ताल से सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवतियों व गंभीर मरीजों को झेलनी पड़ सकती है। सीएमओ ने शुक्रवार को बाहरी कुछ डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी। उन डॉक्टरों ने सिर्फ डिलीवरी सहित आपातकालीन सेवाएं ही देखीं। डॉक्टर एसोसिएशन ने 27 दिसंबर को ऐलान किया था कि यदि डॉक्टरों की मांगें नहीं मानी गईं तो 29 दिसंबर से इमरजेंसी सेवाएं भी बंद कर दी जाएंगी।
हड़ताल पर रहे डॉक्टरों ने बताया कि डॉक्टरों के लिए एक विशेषज्ञ कैडर का गठन नहीं किया जा रहा है। सरकार ने एसएमओ की सीधी भर्ती करनी शुरू कर दी है। इस कारण नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों में भारी गुस्सा है। डॉक्टरों का कहना है कि इसके साथ ही मेडिकल पीजी करने के लिए विद्यार्थियों से एक करोड़ रुपये का अनुबंध करवाया जा रहा है जो कि सरासर गलत है। डॉक्टरों का कहना है कि हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के अनेक पद खाली हैं। इस कारण बड़े स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रहीं हैं। उन्होंने कहा कि सरकार व स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टरों की मांगों को पूरा नहीं किया जा रहा है। डॉक्टरों के कमी के कारण एक डॉक्टर को रोजाना सैकड़ों मरीजों को देखना पड़ता है।
ये हैं डॉक्टरों की मुख्य मांग
- डॉक्टरों की भर्ती निकाली जाए।
- डॉक्टर की पदोन्नति 10 साल में की जाए।
- डॉक्टरों के लिए पीजी कोटा निर्धारित किया जाए।
- एसएमओ की सीधी भर्ती पर तुरंत रोक लगाई जाए।
- स्पेशल डॉक्टरों के लिए एक विशेषज्ञ कैडर का गठन होना चाहिए।
- गतिशील सुनिश्चित कॅरिअर प्रगति (एसीपी) योजना लागू होनी चाहिए।
- एमडी और पीजी कोर्स के लिए एक करोड़ के अनुबंध को घटाकर 50 लाख रुपये किया जाए।