चांदी के सिक्कों पर पुरातत्व विभाग ने दी खास जानकारी
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सदर थाना क्षेत्र में महीनों पहले गाड़ी में बोरियों में भरकर लाए गए नकली सिक्कों के मामले में जांच अटक गई है। इसके पीछे टकसाल द्वारा दो लाख रुपये की भारी भरकम फीस मांगना है। पुलिस ने दरअसल नासिक टकसाल में इन सिक्कों को जांच के लिए भेजा था, जिसकी एवज में टकसाल ने पुलिस से इसकी दो लाख रुपये फीस मांगी है। इसके बाद पुलिस ने अभी तक जांच फीस जमा नहीं करवाई है। जब तक फीस जमा नहीं होगी तब तक इन सिक्कों की असली या नकली होने की पहचान ही नहीं की जा सकती। उधर पुलिस असमंजस में है कि इतनी अधिक जांच फीस आखिर कहां से चुकाए।
इधर मधुबन भेजे सिक्कों के सैंपल
इधर पिछले महीने सिविल लाइन एरिया में मिले नकली सिक्के मामले में पुलिस ने चेस्ट से 10 सिक्के मंगवाकर सैंपल के साथ मधुबन लैब में भेज दिए हैं। जांच के बाद यह पता चल पाएगा कि असली सिक्कों जैसा हूबहू दिखने वाला यह सिक्का किस धातु से बना है। इसके अलावा इस पर जो मुहर लगी है वह भी ओरिजनल है या नहीं। मामले की जांच कर रहे अधिकारी शिव कुमार ने बताया है कि हिसार स्थित एसबीआई की चेस्ट से सैंपल के रूप में असली सिक्के मंगवाए गए हैं। चेस्ट ने पुलिस के पास दस सिक्के भेज दिए हैं। इन्हें मधुबन लैब में जांच के लिए भेजा गया है। उन्होंने कहा कि पहले वे इसे नासिक टकसाल में भेजने की तैयारी में थे मगर पहले ही पुराने मामले में सदर थाना पुलिस द्वारा भेजे गए सिक्कों की जांच फीस 2 लाख रुपये मांगी गई है। इतना अधिक खर्च उठाना विभाग के लिए संभव नहीं। उन्होंने बताया कि मधुबन लैब में जांच की सुविधा है जिसका अधिक खर्च भी नहीं।