हिसार। हिसार का युद्ध-नशे के विरुद्ध के आदर्श वाक्य के साथ मंगलवार को जिले के 273 सरकारी स्कूलों में रेंज के 550 पुलिस के अधिकारियों व कर्मचारियों ने विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान विद्यार्थियों को नशे के विरुद्ध प्रेरक फिल्में दिखाई गई। विद्यार्थियों ने पेंटिंग के माध्यम से नशे के दुष्प्रभावों को उकेरा।
स्कूलों में पहुंचे पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों ने युवाओं को ड्रग के सेवन व इसके क्रय-विक्रय के कठोर कानूनों के बारे में जागरूक किया व युवा वर्ग में नशे के मिथक को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां दी। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए। कार्यक्रम में छात्रों को उनकी जिम्मेवारी का अहसास कराया गया, ‘इनकार का पहिया’ विषय पर बोलते हुए विद्यार्थियों को बताया गया कि वे कैसे शुरुआती दौर में नशे को लेकर बनाए जाने वाले दबाव से अपना बचाव कर सकते हैं।
इस दौरान आईजी राकेश आर्य ने जहाज पुल सीनियर संस्कृति मॉडल स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित किया। पेंटिंग प्रतियोगिता के प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए। इसके अलावा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिसार पूजा वशिष्ठ ने बालसमंद के राजकीय कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल, हांसी के डीएसपी जुगल किशोर ने गांव गुराना के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में, फतेहाबाद के डीएसपी सुभाष चंद्र ने गांव पाबड़ा के सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एएसपी नरवाना ने कुलदीप सिहं ने सुरेवाला उच्च विद्यालय में विद्यार्थियों को जागरूक किया। अपने दोस्तों से अच्छे संबंध रखते हुए गलत आदतों से कैसे बचा जा सकता है। उन्हें बताया गया कि समाज में कई मिथक फैले हैं जो लोगों विशेषकर युवाओं को भ्रमित करते हैं। इनमें से कुछ मिथक इस प्रकार से हैं :-
मिथक : ड्रग रचनात्मकता को बढ़ाती है और उपयोगकर्ता को अधिक कल्पनाशील बनाती है।
तथ्य : यह वास्तव में परिवेश के प्रति उपयोगकर्ता की धारणा को बदलती है और यह उपयोगकर्ता को कारण, प्रभाव और सचेत अनुभव के घटकों को व्यवस्थित वर्गीकृत एवं अलग करने के लिए समझने की क्षमता को भी कम करती है।
मिथक : ड्रग किसी की सोच को तेज करती है और अधिक से अधिक एकाग्रता की ओर ले जाती है।
तथ्य : ड्रग सुस्तता को प्रेरित करती है और शरीर और मस्तिष्क के सामान्य कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।
मिथक : यह अक्सर कहा जाता है कि एक बार जब आप नशे के आदी हो जाते हैं, तो आपके लिए कोई उम्मीद नही हैं।
तथ्य : सच्चाई यह है कि उपचार और दवा की मदद से कोई व्यक्ति खुद को नशीले पदार्थों से दूर कर सकता है और नशीले पदार्थों के सेवन की लत से उभर सकता है।
मिथक : आपने कई लोगों को यह कहते हुए सुना होगा कि वे थोड़ा पीने के बाद भी अच्छी तरह से गाड़ी चला सकते हैं।
तथ्य : आपको यह समझना चाहिए कि लोगों को महसूस होने से पहले ही शराब का प्रभाव जल्द होने लगता है। यह आपके बोल-चाल, स्मृति, ध्यान, समन्वय और संतुलन को प्रभावित करने के लिए हल्की क्षति के साथ शुरू होता है। इसलिए नशे की हालात में गाड़ी चलाना बहुत खतरनाक है।
मिथक : किसी का मानना हो सकता है कि ड्रग्स पर निर्भरता इच्छा शक्ति की विफलता है या स्वयं के चरित्र की ताकत है।
तथ्य : यह है कि ड्रग्स की लत एक मानसिक विकार है। मस्तिष्क के कार्य करने के तरीके में कैसे परिवर्तन हो, इसके लिए प्रत्येक प्रकार की ड्रग्स के दुरुपयोग की अपनी अलग-अलग क्रियाविधि है। ड्रग्स की लत मे पडा व्यक्ति ड्रग्स के लिए लगभग कुछ भी कर सकता है।
मिथक : जो लोग ड्रग्स का उपयोग करते हैं वे बदल नही सकते हैं यह एक ना उम्मीद वाली स्थिति है।
तथ्य : यह है कि सही उपचार एवं निरंतर समर्थन के साथ परिवर्तन हमेशा संभव है बशर्ते व्यक्ति मदद लेने के लिए तैयार हो।
मिथक : ड्रग्स की लत से छुटकारा नहीं पाया जा सकता।
तथ्य : किसी भी नशीले पदार्थ की लत मस्तिष्क की एक पुरानी बीमारी है। इसे परामर्श और कभी-कभी दवा के साथ प्रबंधित किया जा सकता है, लेकिन बीमारी का पुनरावर्तन हमेशा संभव है। देखभाल करने वाले सक्षम चिकित्सकों एवं प्रियजनों के साथ घिरे रहने से आपको लंबे समय तक परहेज करने में मदद मिल सकती है।
मिथक : नशा करने वाले आमतौर पर बेघर, रोजगार या मूलरूप से असफल होते हैं।
तथ्य : कटु सत्य यह है कि कोई भी नशे का आदी हो सकता है, जिसमें डॉक्टर, वकील और शिक्षक जैसे योग्य लोग भी शामिल हैं।